
सीतापुर, 9 जुलाई 2026:
सीतापुर की शिवपुरी कॉलोनी में जमीन के मालिकाना हक को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। जिलाधिकारी न्यायालय ने करीब 25 बीघा जमीन पर बने मकानों, निर्माणाधीन भवनों और खाली प्लॉटों के 27 कब्जाधारकों को सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। नोटिस पाने वालों में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व विधायक अनूप गुप्ता का नाम भी शामिल है। सभी संबंधित लोगों को 24 जुलाई तक डीएम कोर्ट में पहुंचकर अपने स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
बता दें कि शिवपुरी कॉलोनी शहर की प्रमुख आवासीय कॉलोनियों में गिनी जाती है। करीब 30 वर्ष पहले विकसित हुई इस कॉलोनी में बैंक अधिकारियों, सरकारी विभागों के मौजूदा और सेवानिवृत्त कर्मचारियों समेत कई प्रतिष्ठित परिवारों ने अपने मकान बनाए हैं। चौड़ी सड़कें और बेहतर सुविधाओं की वजह से यह शहर की पॉश कॉलोनियों में शामिल रही है। ऐसे में प्रशासन की कार्रवाई के बाद यहां रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

प्रशासनिक टीम ने शिवपुरी कॉलोनी पहुंचकर सार्वजनिक नोटिस चस्पा किए। कार्रवाई की जानकारी मिलते ही इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई। कॉलोनी के लोगों के बीच जमीन के मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। प्रशासन के मुताबिक जांच के दौरान सामने आया कि जिस जमीन पर कॉलोनी बसी है, वह राजस्व अभिलेखों में ग्राम छावनी गोरा बारीक (पूर्व कंटोनमेंट क्षेत्र) के नाम दर्ज है। इसी जमीन पर करीब 27 मकान बने हैं, जबकि कुछ भूखंड अभी खाली हैं या उन पर निर्माण चल रहा है।
बताया जा रहा है कि इससे पहले प्रशासन प्लाईवुड फैक्ट्री की 47 बीघा जमीन को भी कब्जामुक्त करा चुका है। रिकॉर्ड की जांच में अब यह 25 बीघा जमीन भी उसी प्लाईवुड फैक्ट्री की बताई जा रही है। इसी आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू की गई है।
पूर्व विधायक अनूप गुप्ता ने प्रशासन की कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पास संबंधित जमीन की वैध रजिस्ट्री मौजूद है। रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी पूरी की गई थी। उन्होंने बताया कि करीब तीन साल पहले सक्षम प्राधिकारी से भवन निर्माण का नक्शा स्वीकृत होने के बाद ही निर्माण कराया गया। उनका कहना है कि उनके सभी दस्तावेज पूरी तरह वैध हैं और तय समय से पहले जिलाधिकारी न्यायालय में अपना पक्ष रखेंगे।

एसडीएम सदर डॉ. जनार्दन ने बताया कि जिलाधिकारी न्यायालय के आदेश पर सभी संबंधित लोगों को सार्वजनिक नोटिस के जरिए 24 जुलाई तक अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति तय तारीख तक अपने स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य पेश नहीं करता है तो यह माना जाएगा कि उसे नोटिस के संबंध में कोई आपत्ति या दावा नहीं है। ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाएगी।






