सीतापुर, 10 मई 2026:
परिषदीय स्कूलों में मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) की क्वॉलिटी को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। अब स्कूलों में बनने वाला एमडीएम बच्चों को परोसने से पहले प्रधानाध्यापक और किसी एक शिक्षक को खुद चखना होगा। भोजन ठीक मिलने के बाद ही उसे छात्रों को दिया जाएगा।
यह फैसला लहरपुर ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय तारनपुर में तहरी में कीड़ा मिलने की घटना के बाद लिया गया है। इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग ने प्रभारी प्रधानाचार्य को निलंबित कर दिया था। इसके बाद सभी प्रधानाध्यापकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

नए आदेश के मुताबिक स्कूल में बनने वाले भोजन का नमूना पूरे विद्यालय समय तक सुरक्षित रखा जाएगा। अगले दिन स्कूल खुलने पर ही उसे नष्ट किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान अफसर इसी नमूने की जांच कर भोजन की गुणवत्ता परखेंगे। दाल, रोटी, सब्जी या तहरी, जो भी बनेगा, उसका नमूना अलग से रखा जाएगा।
प्रधानाध्यापकों को साफ कहा गया है कि भोजन तैयार करने में केवल ब्रांडेड मसाले और अच्छी गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जाए। अगर जांच या शिकायत के दौरान मानकों में कमी मिली तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
तारनपुर की घटना की जांच में सामने आया कि स्कूल के लिए सोयाबीन गांव की दुकान से बिना ब्रांड वाला खरीदा गया था। ग्रामीणों के मुताबिक दुकानों में लंबे समय तक रखा रहने और बरसात में सीलन लगने से सोयाबीन में कीड़े पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। स्कूल में 300 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं।






