
प्रयागराज, 9 जुलाई 2026:
प्रयागराज के शाह उर्फ पीपलगांव में अवैध प्लॉटिंग पर बुलडोजर चलने के बाद अब प्रशासन ने माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई जा रही जमीन की गहराई से जांच शुरू कर दी है। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने इस मामले में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। टीम यह पता लगाएगी कि संबंधित जमीन सरकारी है या नहीं, उसका मालिक कौन है, क्या वह अतीक अहमद की बेनामी Property है और उस पर अवैध कब्जा या खरीद-फरोख्त किस तरह की गई।
इस कार्रवाई की शुरुआत विधायक पूजा पाल की शिकायत के बाद हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर आरोप लगाया था कि शाह उर्फ पीपलगांव में माफिया अतीक अहमद की बेनामी संपत्ति मौजूद है। शिकायत में कहा गया कि सरकारी जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त कर कब्जा कराया जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की SIT से जांच कराने की मांग की थी।

शिकायत मिलने के बाद मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त को पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए। साथ ही तीन दिन के भीतर संयुक्त रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि शिकायत विधायक पूजा पाल ने मुख्यमंत्री से मिलकर सौंपी थी।
निर्देश मिलने के बाद जिलाधिकारी ने जांच के लिए SIT का गठन कर दिया। टीम में एडीएम सिटी, एआईजी स्टांप, डीसीपी सिटी, एसडीएम सदर और प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के सचिव को शामिल किया गया है। जांच के दौरान जमीन के सभी रिकॉर्ड, खरीद-फरोख्त के दस्तावेज, राजस्व अभिलेख और कब्जे की स्थिति की पड़ताल की जाएगी।

SIT यह भी जांच करेगी कि जमीन सरकारी है या निजी, यदि सरकारी है तो उस पर कब्जा किस तरह हुआ। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जमीन का नामांतरण और बिक्री किन लोगों के नाम पर हुई और पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका रही।
गौरतलब है कि मंगलवार को प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने शाह उर्फ पीपलगांव में करीब 12 बीघा क्षेत्र में विकसित की गई अवैध प्लॉटिंग पर बुलडोजर चलाया था। प्रशासन के मुताबिक यह प्लॉटिंग सुशील यादव, मोहम्मद मुस्लिम, फरमूद मुल्ला, मकबूल अहमद, अनस, वदूद अहमद, लल्लू उर्फ रामनाथ, मेट्रो इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और सुरेंद्र द्विवेदी के नाम से विकसित की जा रही थी, जिसे ध्वस्त कर दिया गया।
प्रशासन अब यह भी पता लगाएगा कि जिन लोगों के नाम पर जमीन दर्ज है, उनका वास्तविक मालिकाना हक क्या है और कहीं यह संपत्ति बेनामी लेनदेन का हिस्सा तो नहीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि अवैध प्लॉटिंग पहले ही हटाई जा चुकी है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि जमीन किसकी है और उस पर कब्जा कैसे हुआ। यदि जांच में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे या भूमाफिया की संलिप्तता की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एंटी-भूमाफिया अभियान के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट और NSA के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।






