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भड़काओ-बवाल कराओ, फिर रोटी सेंकने वाले नेताओं पर बरसीं मायावती, कहा- इनसे होशियार रहिए

बीएसपी प्रमुख ने कहा, कुछ संगठन और पार्टियां दलित समाज को गुमराह कर सड़क पर उतार रही हैं, हिंसा और सड़क जाम से न्याय नहीं मिलता, चुनाव से पहले ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील, कानून और वोट की ताकत पर भरोसा रखने की सलाह

लखनऊ, 10 जुलाई 2026:

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने शुक्रवार को उन संगठनों और राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोला, जो दलित और उपेक्षित समाज को भड़काकर आंदोलन कराते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठन पहले लोगों को सड़क पर उतारते हैं, हिंसा और सड़क जाम जैसी स्थिति पैदा कराते हैं, फिर घटना के बाद मौके पर पहुंचकर राजनीतिक रोटियां सेंकने लगते हैं। इससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, बल्कि उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।

लखनऊ में मीडिया से बातचीत में मायावती ने कहा कि आज के समय में समाज को ऐसे संगठनों और राजनीतिक दलों की रणनीति समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए दुखी और पीड़ित वर्गों की भावनाओं का इस्तेमाल करते हैं। पहले उन्हें भड़काया जाता है और जब हालात बिगड़ जाते हैं तो वही लोग सहानुभूति दिखाकर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।

मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमेशा संविधान और कानून के दायरे में रहकर अधिकारों की लड़ाई लड़ने का रास्ता दिखाया था। उन्होंने कभी भी कानून अपने हाथ में लेने या हिंसक आंदोलन का समर्थन नहीं किया। अगर किसी मामले में न्याय नहीं मिलता है तो अदालतों का दरवाजा खटखटाना चाहिए, न कि सड़क पर उतरकर टकराव का रास्ता अपनाना चाहिए।

उन्होंने मेरठ, सहारनपुर, प्रयागराज और हरदोई समेत कई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में भी लोगों को कानून के रास्ते पर चलना चाहिए। उनका कहना था कि भावनाओं में बहकर किया गया आंदोलन अक्सर पीड़ित परिवारों की परेशानी और बढ़ा देता है।

बीएसपी प्रमुख ने कहा कि दलित, पिछड़े और अन्य उपेक्षित वर्गों के लोगों को चुनाव के समय खास सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनाव से पहले कई संगठन और राजनीतिक दल समाज को भावनात्मक मुद्दों के जरिए प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। ऐसे लोगों की मंशा को समझना जरूरी है।

मायावती ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर ने समाज को वोट की ताकत का महत्व समझाया था। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक सत्ता की मास्टर चाबी अपने हाथ में लेकर ही समाज अपने अधिकारों को मजबूत कर सकता है। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की थी।

उन्होंने कहा कि बीएसपी का मानना है कि समाज की समस्याओं का समाधान संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक भागीदारी के रास्ते से ही निकल सकता है। इसलिए लोगों को भड़काने वाली राजनीति से दूर रहकर अपने वोट की ताकत को मजबूत करना चाहिए।

अपने संबोधन में मायावती ने पूना पैक्ट और गौतम बुद्ध के उपदेशों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में समाज को इनसे सीख लेते हुए एकजुट रहना चाहिए और कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों की लड़ाई आगे बढ़ानी चाहिए।

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