देहरादून, 11 जुलाई 2026:
उत्तराखंड के चर्चित LUCC Chit Fund Scam में सीबीआई ने बड़ा कदम उठाते हुए 18 आरोपियों और लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के खिलाफ देहरादून की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क ने राज्य के एक लाख से ज्यादा लोगों को निवेश के नाम पर जाल में फंसाया और करीब 800 करोड़ रुपये जमा करा लिए। इनमें से 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम निवेशकों को वापस नहीं मिली।
सीबीआई ने समीर अग्रवाल, शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत, सानिया अग्रवाल, माया सिंह राजपूत, जितेंद्र सिंह निरंजन, दिनेश सिंह, गिरीश चंद सिंह बिष्ट, उर्मिला बिष्ट, जगमोहन बिष्ट, ममता भंडारी, तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, सुशील गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन, पंकज कुशल सिंह जैन, राजेंद्र सिंह बिष्ट और लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी को आरोपी बनाया है। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता, भारतीय न्याय संहिता, उत्तराखंड जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम और BUDS Act की अलग-अलग धाराओं में कार्रवाई की गई है।
यह मामला तब सीबीआई के पास आया जब वर्ष 2025 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एलयूसीसी घोटाले से जुड़ी सभी एफआईआर सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। इसके बाद 26 नवंबर 2025 को एजेंसी ने केस दर्ज कर उत्तराखंड के अलग-अलग थानों में दर्ज 18 मुकदमों की जांच अपने हाथ में ले ली।
जांच में सामने आया कि एलयूसीसी का रजिस्ट्रेशन वर्ष 2012 में मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी के तौर पर हुआ था। बाद में वर्ष 2016 में समीर अग्रवाल ने इसका पूरा संचालन अपने कब्जे में ले लिया और नया बोर्ड बनाकर उत्तराखंड में बड़े स्तर पर निवेश योजनाएं शुरू कर दीं। हैरानी की बात यह रही कि राज्य में काम करने की एनओसी वर्ष 2017 में मिली, लेकिन सोसायटी ने उससे पहले ही कारोबार शुरू कर दिया था।
सीबीआई के मुताबिक, सोसायटी के पास कमाई का कोई मजबूत जरिया नहीं था। पुराने निवेशकों को पैसा लौटाने के लिए नए लोगों से रकम जुटाई जाती रही। इसी तरीके से Ponzi Scheme चलाकर हजारों लोगों को ऊंचे रिटर्न का लालच दिया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि उत्तराखंड में सोसायटी की 50 से ज्यादा शाखाओं के जरिए करीब एक लाख लोगों से लगभग 800 करोड़ रुपये जुटाए गए। कुछ निवेशकों को शुरुआती भुगतान किया गया ताकि लोगों का भरोसा बना रहे, लेकिन बाद में भुगतान रुक गया और 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी सामने आई।
सीबीआई ने समीर अग्रवाल को पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया है। जांच में पता चला कि उसने किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन के साथ मिलकर 10 शेल कंपनियां बनाईं। इन कंपनियों के बैंक खातों में निवेशकों का पैसा ट्रांसफर किया गया। इसके बाद कई लेयर में लेनदेन कर रकम सैकड़ों खातों में घुमाई गई ताकि पैसों का असली स्रोत छिपाया जा सके।
जांच में यह भी सामने आया कि समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल देश छोड़कर विदेश चले गए हैं। दोनों को वापस लाने के लिए सीबीआई ने कानूनी प्रक्रिया शुरू कर नोटिस और जरूरी सर्कुलर जारी किए हैं।
चार्जशीट में शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत और दिनेश सिंह को भी सोसायटी के अहम पदों पर रहते हुए साजिश का हिस्सा बताया गया है। वहीं तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला और ममता भंडारी पर अलग-अलग शाखाओं से जुटाई गई नकदी को बैंकिंग सिस्टम से बाहर रखते हुए दूसरे स्थानों तक पहुंचाने का आरोप है।
सुशील गोखरू पर आरोप है कि उसने किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन के साथ मिलकर मुंबई में शेल कंपनियों के बैंक खाते खुलवाए। इन्हीं खातों के जरिए उत्तराखंड के निवेशकों का पैसा इधर-उधर भेजा गया और बाद में कई खातों में बांटकर उसका ट्रेल छिपाने की कोशिश की गई।
मामले की जांच के लिए सीबीआई ने अलग से विशेष टीम बनाई। जांच के दौरान उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में आरोपियों से जुड़ी 39 संपत्तियों का पता लगाया गया। इनमें से 29 संपत्तियों पर सक्षम प्राधिकारी ने अनंतिम कुर्की के आदेश जारी कर दिए हैं। बाकी 10 संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया भी चल रही है। इन संपत्तियों की पुष्टि के लिए अदालत में आवेदन भी दाखिल किए जा रहे हैं।
सीबीआई अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें तरुण कुमार मौर्य, ममता भंडारी, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, राजेंद्र सिंह बिष्ट, सुशील गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन शामिल हैं। सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है और आगे भी कार्रवाई की जाएगी।






