
लखनऊ, 20 जुलाई 2026:
उत्तर प्रदेश में पुराने और अनुपयोगी वाहनों को सड़कों से हटाने की मुहिम अब असर दिखाने लगी है। सरकार की Vehicle Scrappage Policy के तहत अभी तक प्रदेश में 1.95 लाख से ज्यादा पुराने वाहनों को अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटरों के जरिए हटाया जा चुका है। इनमें 1.85 लाख से अधिक निजी वाहन और 10 हजार से ज्यादा सरकारी वाहन शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इससे सड़क सुरक्षा मजबूत होगी, प्रदूषण कम होगा और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
ऑनलाइन सिस्टम से आसान हुई पूरी प्रक्रिया
वाहन स्क्रैपिंग की प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाया गया है। प्रदेश में अब तक 101 Registered Vehicle Scrapping Facility (RVSF) का पंजीकरण हो चुका है, जिनमें से 50 सेंटर संचालन में हैं। सभी केंद्र केंद्र सरकार के V-Scrap Portal और वाहन सिस्टम से जुड़े हैं। इससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो रही है और वाहन मालिकों को बेवजह दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे।
फिटनेस टेस्ट के बाद लिया जाता है फैसला
परिवहन विभाग के मुताबिक किसी भी वाहन को सीधे स्क्रैप नहीं किया जाता। पहले उसकी जांच आधुनिक Automated Testing Station (ATS) में कम्प्यूटरीकृत मशीनों से होती है। जांच के दौरान मानवीय हस्तक्षेप नहीं रहता। अगर वाहन तय सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर खरा नहीं उतरता तो उसे पहले अनफिट घोषित किया जाता है। दोबारा जांच में भी असफल रहने पर उसे End of Life Vehicle (ELV) मानकर स्क्रैपिंग के लिए भेजा जाता है।
दुर्घटनाएं और प्रदूषण कम करने पर फोकस
सरकार का मानना है कि पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के हटने से सड़क हादसों में कमी आएगी। इसके साथ वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा। स्क्रैप से निकलने वाली धातु और दूसरी सामग्री का वैज्ञानिक तरीके से Recycling होने से उद्योगों को भी फायदा मिलेगा और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।

30 नए स्क्रैपिंग सेंटर की तैयारी
प्रदेश में स्क्रैपिंग नेटवर्क को और मजबूत करने की तैयारी चल रही है। जिन जिलों में अभी तक स्क्रैपिंग सेंटर नहीं हैं, वहां निजी निवेश के जरिए नए केंद्र खोलने को बढ़ावा दिया जा रहा है। फिलहाल 30 नए स्क्रैपिंग सेंटर के प्रस्ताव और आवेदन प्रक्रिया में हैं। इनके शुरू होने के बाद यह सुविधा प्रदेश के अधिकतर जिलों तक पहुंच जाएगी।
वाहन मालिकों को मिल रहे कई फायदे
अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर वाहन जमा करने के बाद मालिक को Certificate of Deposit दिया जाता है। इस प्रमाणपत्र के आधार पर नया व्यावसायिक वाहन खरीदने पर रोड टैक्स में 10 फीसदी तक और निजी वाहन खरीदने पर 15 फीसदी तक की छूट मिलती है। इसके अलावा स्क्रैप किए गए वाहन का मूल्य भी वाहन मालिक को दिया जाता है। अगर कोई व्यक्ति तुरंत नया वाहन नहीं खरीदना चाहता तो तय नियमों के तहत अपने डिपॉजिट सर्टिफिकेट का हस्तांतरण भी कर सकता है।
उद्योग और रोजगार को भी मिल रहा फायदा
Vehicle Scrappage Policy का असर ऑटोमोबाइल सेक्टर के साथ Recycling Industry पर भी दिखाई दे रहा है। स्टील, एल्युमिनियम, तांबा, प्लास्टिक और रबर जैसे कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ने से विनिर्माण लागत कम होने की उम्मीद है। वहीं स्क्रैपिंग सेंटर, लॉजिस्टिक्स, मशीन संचालन, गुणवत्ता परीक्षण और पर्यावरण प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं।






