
लखनऊ, 22 जुलाई 2026:
दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव को पुलिस द्वारा कस्टडी में लिए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार रात लखनऊ समेत कई जिलों में सपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है।
राजभर ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि, ‘मित्र अखिलेश जी, आप पेपर लीक पर प्रदर्शन करने और झूठी गिरफ्तारी कराने कहां चले गए? क्या आपको अपनी सरकार का दौर याद नहीं है?’ उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में स्कूलों में खुलेआम नकल होती थी और परीक्षा व्यवस्था को कारोबार बना दिया गया था। उनके मुताबिक हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रश्नपत्र पैसों के बदले बेचे जाते थे और फर्जी प्रमाणपत्रों का खेल चलता था।
राजभर ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय भ्रष्टाचार इस कदर था कि यादव और मुस्लिम के अलावा किसी अन्य वर्ग के लोगों को नौकरी नहीं मिलती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी नौकरियों की गाइडलाइन जारी होते ही चचा-भतीजा वसूली के लिए बोरा लेकर निकल जाते थे।
सुभासपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव का भी जिक्र करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उनके दाखिले को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि धर्मेंद्र यादव में विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास करने की क्षमता भी नहीं थी और शिक्षा व्यवस्था पर बोलने का नैतिक अधिकार सपा नेताओं के पास नहीं है।
राजभर ने आगे कहा कि सपा छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर ईमानदार नहीं है बल्कि उनका इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ और सत्ता हासिल करने के लिए कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष छात्रों की भावनाओं को भड़काकर प्रदेश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है। राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश में छात्र आंदोलन और सियासी टकराव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।






