
न्यूज डेस्क, 22 जुलाई 2026:
देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर राजनीतिक और छात्र आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन बुधवार को 33वें दिन भी जारी है। सुबह से ही हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जुटने लगे। उनमें 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस का सामना करने वाले छात्र भी शामिल रहे।
आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों से दूसरी बार बातचीत की पेशकश की है। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार का प्रस्ताव मिला है लेकिन इस पर अंतिम निर्णय संगठन की कोर टीम से चर्चा के बाद लिया जाएगा। हालांकि उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर से आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

बढ़ती भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली में 16 मेट्रो स्टेशनों को एहतियातन बंद कर दिया गया है। राजधानी के कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
इस बीच आंदोलन से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम भी सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने मंगलवार देर रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मंगलवार को उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया।

दूसरी ओर संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग थानों में 10 एफआईआर दर्ज की हैं। प्रदर्शनकारियों पर RAF जवानों पर जानलेवा हमला, पथराव, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस इन मामलों की जांच में जुटी है।
उधर, जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट आज सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 18 जुलाई को पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाया, हिरासत में लिया और आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया। याचिका में अदालत से यह भी आग्रह किया गया है कि सुनवाई पूरी होने तक सोनम वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बिना विधिक प्रक्रिया के कोई जबरन कार्रवाई, हिरासत या उत्पीड़न न किया जाए।हाईकोर्ट की सुनवाई और सरकार की वार्ता पहल के बीच अब पूरे आंदोलन की दिशा पर देश की नजरें टिकी हुई हैं।






