
हरदोई, 29 अगस्त 2026:
यूपी के हरदोई जिले के पिहानी इलाके के दो युवकों का नेपाल में आई बाढ़ के बाद से कोई पता नहीं चल रहा है। अहेमी गांव झाला निवासी पपेंद्र सिंह करीब 35 साल के हैं, जबकि ऋषिपाल सिंह की उम्र करीब 25 साल है। दोनों नेपाल के अपर त्रिशूली हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट-वन में काम करते थे। 25 अगस्त को परिवार से आखिरी बार बात हुई थी, इसके बाद दोनों के मोबाइल बंद हैं।
पांच साल से नेपाल में काम कर रहे थे पपेंद्र
पपेंद्र सिंह दरबार सिंह के बेटे हैं। वह करीब पांच साल से नेपाल में काम कर रहे थे। कुछ समय पहले छुट्टी लेकर घर आए थे। परिवार के साथ वक्त बिताने के बाद 22 जुलाई को नेपाल लौट गए थे। उनकी पत्नी रविंद्र कौर से करीब रोज फोन पर बात होती थी।

आखिरी बातचीत के बाद नहीं आया फोन
रविंद्र कौर के मुताबिक 25 अगस्त की रात पपेंद्र से सामान्य बातचीत हुई थी। उस समय ऐसी कोई बात नहीं हुई जिससे किसी खतरे का अंदाजा लगे। फोन कटने के बाद दोबारा संपर्क नहीं हो सका। परिवार ने कई बार फोन मिलाया, लेकिन मोबाइल बंद मिला।

ऋषिपाल भी दो साल से नेपाल में थे
पपेंद्र के साथ ऋषिपाल सिंह भी उसी प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। वह करीब दो साल से नेपाल में रहकर परिवार का खर्च चला रहे थे। 25 अगस्त के बाद उनसे भी संपर्क टूट गया। दोनों परिवारों ने नेपाल में मौजूद लोगों, रिश्तेदारों व कंपनी से जुड़े लोगों से जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई पक्की सूचना नहीं मिली।
एक क्रेन ऑपरेटर, दूसरा कटर मैन
पपेंद्र प्रोजेक्ट में क्रेन ऑपरेटर का काम करते थे, जबकि ऋषिपाल कटर मैन थे। नेपाल में बाढ़ के बाद हालात बिगड़ने पर दोनों के परिवार लगातार उनकी जानकारी जुटाने में लगे हैं। परिवार के कुछ लोग नेपाल पहुंचकर खुद भी तलाश कर रहे हैं।

कंपनी चला रही रेस्क्यू ऑपरेशन
परिजनों को कंपनी की तरफ से बताया गया है कि लापता कर्मचारियों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हरदोई में मौजूद परिवार लगातार फोन के जरिए नेपाल से किसी सूचना का इंतजार कर रहे हैं।
पिता की एक ही मांग
पपेंद्र के पिता दरबार सिंह का कहना है कि उन्हें किसी मुआवजे की जरूरत नहीं है। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि बेटे की सही जानकारी जल्द मिले। परिवार चाहता है कि सरकार नेपाल में तलाश तेज करवाकर दोनों युवकों के बारे में पुख्ता जानकारी दिलाए।
हर कॉल पर टिकी है नजर
पपेंद्र की पत्नी व परिवार के दूसरे लोग लगातार मोबाइल देखते रहते हैं। अनजान नंबर से आने वाली हर कॉल पर उम्मीद बंधती है कि शायद नेपाल से कोई खबर आई हो। ऋषिपाल के परिवार की स्थिति भी ऐसी ही है। दोनों परिवारों को अब तक यही पता है कि 25 अगस्त के बाद उनका अपनों से संपर्क नहीं हुआ है।






