
राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 7 सितंबर 2026ः
सोशल मीडिया का उपयोग करने वालीं महिलाएं और बुजुर्ग नागरिक सावधान रहें। आजकर साइबर अपराधी सोशल मीडिया के जरिए ऐसे लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ये लोग कभी पुलिस अधिकारी तो सभी सीबीआई बनकर लोगों को डराकर डिजिटल अरेस्ट करके उनकी रकम अपने खाते में जमा करवा लेते हैं। ऐसा ही मामला उत्तराखंड के अल्मोड़ा से सामने आया है। साइबर अपराधियों ने टेलीकॉम रेग्यूलेटरी विभाग का अधिकारी बनकर एक बुजुर्ग महिला को 12 दिनों तक वाट्सएप कॉल के जरिए कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट रखा और उससे 1 करोड़ 20 लाख रुपये की ठगी कर ली। एसटीएफ ने एक आरोपी को पश्चिम बंगाल के मालदा से गिरफ्तार किया है।
एसटीएफ के अनुसार पीड़िता ने जनवरी 2026 में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि दिसंबर 2025 में साइबर अपराधियों ने उन्हें वाट्सएप कॉल की। खुद को टेलीकॉम रेग्यूलेटरी विभाग का अधिकारी बताते हुए आरोपियों ने कहा कि उनका आधार कार्ड केनरा बैंक खाते से लिंक है और खाते में बड़ी रकम का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। इसके अलावा पीड़िता के खिलाफ पांच हजार एफआईआर दर्ज होने की बात कहकर उन्हें भयभीत किया गया। आरोपियों ने पीड़िता को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए लगातार वाट्सएप कॉल पर बने रहने को कहा और उन्हें किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं करने की हिदायत दी। ठगों ने बैंक खातों के सत्यापन के नाम पर अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराई।
पुलिस के अनुसार 12 दिनों के दौरान पीड़िता से कुल 1 करोड़ 20 लाख 18 हजार रुपये विभिन्न बैंक खातों में जमा कराए गए। एसटीएफ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और वाट्सएप से जुड़ा डिजिटल डाटा जुटाया। संबंधित बैंकों, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और मेटा से प्राप्त जानकारी का तकनीकी विश्लेषण करने पर ठगों तक पहुंचने में मदद मिली।
जांच में सामने आए बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के सत्यापन के बाद पुलिस टीम ने आरोपी शान्तनु दास को मालदा से गिरफ्तार कर लिया। एसटीएफ के अनुसार आरोपी साइबर ठगी से प्राप्त रकम को अपने बैंक खाते में मंगाने के बाद तत्काल दूसरे खातों में स्थानांतरित कर देता था। इसी क्रम में उसके खाते में पीड़िता से ठगी गई 1.20 करोड़ रुपये से अधिक की रकम पहुंची थी। मामले में अन्य आरोपियों और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच की जा रही है।






