Uttarakhand

जंगलों में बढ़ती आग पर उठे सवाल, वन मंत्री की सफाई, कहा… वीडियो न बनाएं, आग बुझाने में करें मदद

मीडिया से रूबरू हुए सुबोध उनियाल, कहा- प्रदेश में 100 दिन के भीतर जंगलों में आग की 394 घटनाएं दर्ज हुईं, सबसे ज्यादा असर टिहरी, चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ में दिखा। मंत्री ने माना कि बढ़ती गर्मी, सूखा और अल नीनो जैसी स्थितियां आग की बड़ी वजह बन रहीं

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 26 मई 2026:

उत्तराखंड के जंगलों में आग (वनाग्नि) की लगातार बढ़ रही घटनाओं को लेकर सरकार पर उठ रहे सवालों के बीच वन मंत्री सुबोध उनियाल ने मंगलवार को सफाई दी। उन्होंने मीडिया से रूबरू होकर कहा कि जंगलों में आग की घटनाओं को सिर्फ सरकारी इंतजामों से नहीं रोका जा सकता, इसके लिए आम लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि आग लगने पर वीडियो बनाने के बजाय उसे बुझाने में सहयोग करें।

वन विभाग मुख्यालय स्थित मंथन सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में मंत्री उनियाल ने बताया कि प्रदेश में 15 फरवरी से 25 मई के बीच वनाग्नि की 394 घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं में करीब 331.12 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि इस बार लंबे सूखे, बढ़ते तापमान, अनियमित मानसून और अल नीनो जैसी परिस्थितियों की वजह से जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ी हैं।

वन मंत्री के मुताबिक टिहरी, चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिले सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग स्थानीय लोगों, स्वयंसेवी संस्थाओं और अलग-अलग समूहों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चला रहा है। विभाग ने कई वन प्रभागों को फायर रोधी सूट, ग्लब्स, हेलमेट और जूते भी उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा कि वनाग्नि रोकथाम को आजीविका से जोड़ने की भी कोशिश की जा रही है ताकि स्थानीय लोग इस अभियान से सीधे जुड़ें। मीडिया से भी अफवाहों से बचने और लोगों को जागरूक करने में सहयोग मांगा गया।

सुबोध उनियाल ने पिछले दस वर्षों के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि प्रदेश में इस दौरान वनाग्नि की 14,638 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 23,682.77 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि वनाग्नि की घटनाओं के मामले में उत्तराखंड देश में 14वें स्थान पर है और सरकार इस स्थिति में सुधार के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्य वन संरक्षक सुशांत कुमार पटनायक समेत वन विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।

READ MORE 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button