स्पोर्ट्स डेस्क, 26 मई 2026;
भारतीय खेल इतिहास में कुछ पल ऐसे होते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। ऐसा ही एक स्वर्णिम अध्याय पंजाब के तेज तर्रार धावक गुरिंदरवीर सिंह ने लिखा है। उन्होंने 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन कप चैंपियनशिप में पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा में न केवल स्वर्ण पदक जीता बल्कि एक ऐसा राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया जिसने भारतीय एथलेटिक्स को विश्व मंच पर नई पहचान दी है। उन्हें ‘फास्टेस्ट मेन इन इंडियन हिस्ट्री’ का टाइटल मिला। इसके अलावा गुरिंदरवीर एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भी क्वालीफाई कर गए हैं।
10.09 सेकंड में पूरी की रेस
रांची में आयोजित इस प्रतियोगिता में गुरिंदरवीर ने मात्र 10.09 सेकंड में अपनी रेस पूरी की। इस अविश्वसनीय समय के साथ वह भारत के इतिहास में 10.10 सेकंड की दीवार को लांघने वाले पहले एथलीट बन गए हैं। ट्रैक एंड फील्ड में इस टाइमिंग को एक मील का पत्थर माना जाता है। उनकी इस रफ्तार ने पूरे देश के खेल प्रेमियों को झूमने पर मजबूर कर दिया है और उन्होंने साबित कर दिया कि भारतीय एथलीट भी रफ्तार के मामले में किसी से कम नहीं हैं।
अंतरराष्ट्रीय खिताब और पदक
गुरिंदरवीर सिंह ने 10.09 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने से पहले भी जूनियर और सीनियर स्तर पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई महत्वपूर्ण खिताब और पदक अपने नाम किये हैं जैसे एशियन अंडर-18 चैंपियनशिप 2017 (बैंकॉक) जिसमे उन्होंने पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर एशिया के सबसे तेज युवा धावक का खिताब हासिल किया था। एशियन अंडर-20 चैंपियनशिप 2018 (गिफू, जापान) की प्रतियोगिता में उन्होंने भारत की 4 गुणा 100 मीटर रिले टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा साउथ एशियन गेम्स 2019 (काठमांडू) में उन्होंने भारत के लिए 4 गुणा 100 मीटर रिले स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया था।

राष्ट्रीय खिताब और रिकॉर्ड्स
गुरिंदरवीर ने 2024 में 63वीं नेशनल इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 10.32 सेकंड के साथ 100 मीटर दौड़ का गोल्ड जीता था। मार्च 2026 में उन्होंने इंडोर स्पर्धा के तहत 60 मीटर दौड़ को महज 6.60 सेकंड में पूरा कर एक अन्य राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था जो वर्तमान में भी उनके नाम दर्ज है। अप्रैल 2025 में उन्होंने भारतीय रिले टीम के साथ मिलकर 38.69 सेकंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया था।
कड़े संघर्ष और अटूट समपर्ण की कहानी
गुरिंदरवीर की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। पंजाब के जालंधर से ताल्लुक रखने वाले गुरिंदरवीर ने ट्रैक पर इस मुकाम को हासिल करने के लिए सालों तक कड़ी मेहनत की और पसीना बहाया है। कोचों के मार्गदर्शन में कड़े अभ्यास और सख्त डाइट और कई चोटों से संघर्ष झेलने के बाद ही वह इस स्तर पर पहुंच पाए हैं। ट्रैक पर उनकी गजब की शुरुआत और आखिरी के 30 मीटर में उनकी फिनिशिंग स्पीड देखने लायक होती है जो उन्हें अन्य धावकों से अलग बनाती है।
विश्व स्तर पर भारतीय रफ्तार की चर्चा
आमतौर पर जब भी 100 मीटर रेस की बात होती है तो दुनिया का ध्यान जमैका के महान धावक उसेन बोल्ट (9.58 सेकंड का विश्व रिकॉर्ड) या अमेरिकी धावकों पर जाता है। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि एशियाई और विशेषकर भारतीय धावकों के लिए 100 मीटर स्प्रिंट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करना बेहद कठिन है लेकिन गुरिंदरवीर ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। उनका 10.09 सेकंड का समय यह दर्शाता है कि अब भारत दुनिया के सबसे तेज धावकों के क्लब में शामिल होने के बेहद करीब है।
भविष्य की राह और ओलंपिक का सपना
इस राष्ट्रीय रिकॉर्ड को बनाने के बाद गुरिंदरवीर सिंह की नजरें अब आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, एशियाई खेलों और ओलंपिक पर टिकी हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गुरिंदरवीर को इसी तरह की विश्व स्तरीय सुविधाएं सही ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर मिलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब कोई भारतीय धावक ओलंपिक के 100 मीटर के फाइनल ट्रैक पर दौड़ता हुआ नजर आएगा। सरकार और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया भी अब उन पर विशेष ध्यान दे रही है। गुरिंदरवीर सिंह ने अपनी इस ऐतिहासिक दौड़ से देश के लाखों युवाओं को यह विश्वास दिलाया है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से किसी भी असंभव दिखने वाले लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। पूरा देश आज इस युवा धावक की रफ्तार को सलाम कर रहा है और भविष्य में उनसे और भी बड़े कारनामे की उम्मीद कर रहा है।






