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सरकारी स्कूलों के बच्चों में रीडिंग हैबिट डालने पर जोर… जानिए सरकार की प्लानिंग

अपर मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को व्यक्तिगत व समर्पित प्रयास करने के दिए निर्देश, परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में रीडिंग गतिविधियों के लिए चलाए गए अभियान को नई गति देने पर जोर

लखनऊ, 26 मई 2026ः

योगी सरकार अब परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अंदर पाठ्यक्रम से हटकर पढ़ने की आदत और उनकी भाषा को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दे रही है। सरकार चाहती है कि बच्चों में भाषा दक्षता और रचनात्मक सोच विकसित हो। शैक्षिक सत्र 2026-27 के शुभारंभ के अवसर पर रीडिंग गतिविधियों से संबंधित पहले जारी हुए निर्देशों का फिर से अनुपालन करने को कहा गया है।

अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से पहले ही विद्यालयों में रीडिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक निर्देश जारी किए जा चुके हैं। अब उन्हीं निर्देशों का पालन करने के लिए समस्त प्राचार्य डायट, एडी बेसिक, बीएसए, बीईओ आदि को निर्देशित किया गया है कि विद्यालयों में पठन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत व समर्पित प्रयास करें।

योगी सरकार का जोर परिषदीय एवं माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई को केवल पाठ्यक्रम आधारित न रखते हुए विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित कर भाषा दक्षता, संवाद क्षमता, तार्किक सोच और रचनात्मक अभिव्यक्ति को मजबूत करने पर है। इनमें विद्यालयों में नियमित रीडिंग ऑवर, समाचार-पत्र उपलब्ध कराना, सुबह की सभा में समाचार वाचन और बच्चों को पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित करना शामिल है। यही कारण है कि ‘समाचार-पत्र पठन’, ‘रीडिंग ऑवर’ व ‘स्क्रीन टाइम कम करने’ जैसी गतिविधियों को अब और अधिक गंभीरता के साथ लागू कराने पर जोर दिया जा रहा है।

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विद्यालयों में ‘डियर’ (ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड) कैंपेन को भी संचालित करने पर जोर दिया गया है। इसके तहत सप्ताह में एक निर्धारित समय पर छात्र-छात्राएं, शिक्षक और प्रधानाध्यापक अपनी पसंद की पुस्तकें पढ़ेंगे। इसके अलावा प्राथमिक स्तर पर ‘सुपर-20’ और उच्च प्राथमिक स्तर पर ‘सुपर-30’ रीडिंग चैलेंज जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। निर्धारित संख्या में पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाएगा। विद्यालय स्तर पर सर्वाधिक पुस्तकें पढ़ने वाले छात्र-छात्रा को ‘चैंपियन रीडर ऑफ द इयर’ घोषित कर पुरस्कृत किया जाएगा।

शासन की मंशा है कि विद्यार्थी पुस्तक पढ़ने तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी स्वतंत्र लेखन क्षमता और रचनात्मक सोच भी मजबूत हो। इसके अंतर्गत पढ़ी गई पुस्तकों, कहानियों और समाचार-पत्रों के आधार पर विद्यार्थियों से लेखन कार्य एवं रचनात्मक गतिविधियां कराई जाएंगी। साथ ही विद्यालय स्तर पर लेखन प्रतियोगिताओं के आयोजन पर भी विशेष जोर दिया गया है।

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