
लखनऊ, 7 सितंबर 2026:
यूपी में बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए सरकार अब पढ़ाई को किताबों के बोझ के बजाय कहानी, संवाद और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी में है। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर मंगलवार को प्रदेशभर के को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों, बालवाटिकाओं और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ गतिविधि आयोजित की जाएगी।
इस पहल का मकसद सिर्फ बच्चों को कहानी सुनाना नहीं अपितु कहानी के जरिए उनके भीतर सुनने, समझने, सवाल करने, अपनी बात कहने, कल्पना करने और रचनात्मक सोच विकसित करने का माहौल तैयार करना है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा के निर्देश पर जारी कार्यक्रम में बालवाटिका के साथ डायट स्तर पर भी गतिविधियों को प्रभावी तरीके से आयोजित करने और स्थानीय नवाचारों को शामिल करने पर जोर दिया गया है।
कहानी सुनेंगे बच्चे, सवालों के जवाब देकर दिखाएंगे अपनी सोच
को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में बालवाटिका हस्तपुस्तिका की दिवस योजना के अनुसार स्वागत समय और स्वतंत्र खेल के बाद कहानी सत्र में यह गतिविधि कराई जाएगी। बच्चों की उम्र और समझ के अनुसार राज्य स्तर से उपलब्ध बिग बुक या स्थानीय कहानी का चयन किया जाएगा।

कहानी में ऐसा संदेश शामिल होगा जिससे बच्चों को सीख भी मिले और उनकी रुचि भी बनी रहे। कहानी सुनाने के दौरान बच्चों से बंद और खुले छोर वाले सवाल पूछे जाएंगे। इसका उद्देश्य बच्चों को केवल कहानी सुनने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें सोचने और अपने शब्दों में जवाब देने के लिए प्रोत्साहित करना है।
डायट में अभिभावक से लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तक होंगे शामिल
इस अभियान का दायरा सिर्फ बालवाटिकाओं तक सीमित नहीं रहेगा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में भी विशेष कहानी सत्र आयोजित किए जाएंगे। स्थानीय जरूरतों के अनुसार इसमें नए और नवाचारी प्रयोग शामिल किए जा सकेंगे।
कार्यक्रम में आसपास की बालवाटिकाओं के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, एकेडमिक रिसोर्स पर्सन, बच्चों और अभिभावकों को भी आमंत्रित किया जा सकेगा। डायट स्तर पर कहानी पढ़ने, कहानी के बाद बच्चों से चर्चा और प्रश्नोत्तर तथा अभिभावकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और एकेडमिक रिसोर्स पर्सन की सहभागिता से कहानी वाचन जैसी गतिविधियां प्रस्तावित हैं।
कहानी सुनकर बच्चे बनाएंगे चित्र, फिर खुद बताएंगे उसका मतलब
कहानी खत्म होने के बाद बच्चों की रचनात्मकता को सामने लाने के लिए उन्हें कागज और रंग उपलब्ध कराए जाएंगे। बच्चे कहानी से प्रेरित चित्र बनाएंगे और अपने बनाए चित्र के बारे में खुद अपनी बात बताएंगे। बच्चों की तैयार सामग्री को सुरक्षित रखने और उनके चित्रों को प्रदर्शित कर उनकी सराहना करने पर भी जोर दिया गया है। इसके जरिए बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने और आत्मविश्वास के साथ अभिव्यक्ति का अवसर मिलेगा।
सभी बालवाटिकाओं में गतिविधि सुनिश्चित करने के लिए प्रधानाध्यापक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और संबंधित शिक्षण सहयोगियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि कहानी बच्चों के सीखने, सोचने और अपनी बात कहने का सहज माध्यम है। उनके मुताबिक यह गतिविधि बालवाटिका में बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देते हुए साक्षरता की मजबूत नींव तैयार करने में मदद करेगी।
वहीं, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत आधार देने के लिए सीखने को आनंद और रचनात्मकता से जोड़ रही है। ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ जैसी गतिविधियां बच्चों में भाषा, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति के विकास में अहम भूमिका निभाएंगी।






