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‘एक पेड़ मां के नाम’ से रचा कीर्तिमान, CM योगी की भावुक अपील- हर शुभ अवसर पर लगाएं एक पेड़

'योगी की पाती' में प्रकृति संरक्षण को बताया सनातन संस्कृति का आधार, जन्मदिन, बेटी की विदाई और पारिवारिक उत्सवों को पौधरोपण से जोड़ने का किया आह्वान

लखनऊ, 13 जुलाई 2026:

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर प्रदेशवासियों के नाम ‘योगी की पाती’ लिखकर पर्यावरण संरक्षण का भावनात्मक संदेश दिया है। पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में प्रदेश द्वारा 40 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य पूरा होने पर मुख्यमंत्री ने इसे नए भारत के नए उत्तर प्रदेश की सामूहिक शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल पौधरोपण का अभियान नहीं अपितु प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, आने वाली पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व और जीवन संरक्षण का महोत्सव है।

मुख्यमंत्री ने पत्र में सभी प्रदेशवासियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता का आरंभ वनों से हुआ है, इसलिए इसे अरण्य संस्कृति भी कहा जाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि वेद, उपनिषद और अनेक महान ग्रंथों की रचना वनों में हुई जहां ऋषि-मुनियों ने लोकमंगल के लिए चिंतन किया। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्र, पुराण और परंपराएं मानव जीवन के हर संस्कार में वृक्षों के महत्व को स्वीकार करती हैं।
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योगी आदित्यनाथ ने आयुर्वेद का उल्लेख करते हुए कहा कि संसार में शायद ही कोई ऐसा पौधा हो जिसमें औषधीय गुण न हों। उन्होंने ऋग्वेद में पृथ्वी और वृक्षों के संबंध तथा श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा ‘वृक्षों में मैं अश्वत्थ (पीपल) हूं’ कहे जाने का उल्लेख किया। इसके साथ ही महाभारत और पुराणों में पीपल, वट, आंवला, बेल और पारिजात जैसे वृक्षों के महत्व को भी रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से शुरू हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान और राज्य सरकार की पर्यावरण संरक्षण संबंधी प्रतिबद्धता के कारण वर्ष 2017 से 2023 के बीच प्रदेश के वन एवं वृक्ष आवरण में 3 लाख 38 हजार एकड़ की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज हुई है। प्रदेश का हरित आवरण 9.96 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अब तक 280 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।

अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने लोगों से वृक्षारोपण को जीवन का संस्कार बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों के जन्मदिन, बेटी की विदाई, विवाह, पारिवारिक उत्सव और अन्य शुभ अवसरों पर एक पौधा अवश्य लगाया जाए। उनका कहना था कि आज पर्यावरण असंतुलन, कार्बन उत्सर्जन, वनों के क्षरण और जैव विविधता के संकट का सबसे प्रभावी समाधान वृक्ष ही हैं। यही पौधे आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, सुरक्षित और समृद्ध उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव बनेंगे।

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