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शेयर बाजार पर Middle East संकट की मार, Sensex लुढ़का, Nifty 24,000 के करीब फिसला

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से निवेशकों की चिंता बढ़ी, शुरुआती कारोबार में रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ा, विश्लेषकों का मानना है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय बाजार की बुनियाद अब भी मजबूत

बिजनेस डेस्क, 13 जुलाई 2026:

भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ की। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद किए जाने की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसका असर यह रहा कि कारोबार शुरू होते ही बीएसई Sensex 650 अंक तक लुढ़क गया, जबकि NSE Nifty 24,000 के स्तर के करीब पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपये पर भी दबाव दिखा और वह डॉलर के मुकाबले 34 पैसे कमजोर होकर 95.72 पर पहुंच गया।

शुरुआत से ही दबाव में दिखा बाजार

सुबह के कारोबार में करीब 9 बजकर 41 मिनट पर Sensex 446.48 अंक यानी 0.57 फीसदी की गिरावट के साथ 77,122.91 पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 137.21 अंक टूटकर 24,069.70 पर पहुंच गया। शुरुआती घंटों में दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब 0.9 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।

पिछले कारोबारी सत्र में बाजार ने शानदार तेजी दिखाई थी। शुक्रवार को Sensex 827.57 अंक चढ़कर 77,569.39 पर बंद हुआ था, जबकि Nifty 244.10 अंक की बढ़त के साथ 24,206.90 पर पहुंचा था। हालांकि सोमवार को वैश्विक हालात ने बाजार का पूरा माहौल बदल दिया।

Auto और Metal शेयरों में सर्वाधिक बिकवाली

सोमवार को सबसे ज्यादा दबाव Auto और Metal सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला। निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए इन सेक्टरों में जमकर बिकवाली की। Sensex की प्रमुख कंपनियों में इंटरग्लोब एविएशन, टाटा स्टील, मारुति, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक और बजाज फिनसर्व के शेयर नुकसान में रहे। वहीं दूसरी ओर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एनटीपीसी, एचसीएल टेक और पावर ग्रिड के शेयरों में सीमित बढ़त देखने को मिली।

Middle East तनाव बना सबसे बड़ी वजह

बाजार में आई इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद किए जाने की खबर ने कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। यही समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम Oil Trade Routes में गिना जाता है। ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। ब्रेंट क्रूड करीब 3.96 फीसदी की तेजी के साथ 79.02 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। तेल महंगा होने की आशंका ने महंगाई और वैश्विक आर्थिक दबाव की चिंता भी बढ़ा दी है।

एशियाई बाजारों में भी दिखा असर

भारत ही नहीं, एशिया के कई बड़े शेयर बाजार भी दबाव में रहे। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 7 फीसदी तक टूट गया। जापान का निक्केई 225, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग भी उतार-चढ़ाव के बीच कारोबार करते रहे।

वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी का माहौल दिखा। एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 0.3 फीसदी की गिरावट रही। निक्केई 225 फ्यूचर्स 1.8 फीसदी नीचे रहा, जबकि टोपिक्स इंडेक्स 0.7 फीसदी कमजोर हुआ। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 और चीन का शंघाई कंपोजिट भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। हालांकि हांगकांग का हैंग सेंग विपरीत माहौल में करीब एक फीसदी की बढ़त बनाने में सफल रहा।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी के बाद बदला माहौल

शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने भारतीय बाजार में 2,603.72 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। इससे बाजार में मजबूती का माहौल बना था, लेकिन सोमवार को अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम ने निवेशकों का रुख बदल दिया।

आगे क्या रह सकती है बाजार की चाल

Market Experts का मानना है कि Middle East में तनाव बना रहा तो आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। खासकर कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर रहेगी। हालांकि विश्लेषकों का यह भी कहना है कि मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था, बेहतर कॉरपोरेट प्रदर्शन और लंबी अवधि के निवेश का रुझान भारतीय शेयर बाजार को सहारा दे सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के हालात और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले अगले संकेतों पर टिकी रहेगी।

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