Uttarakhand

मानदेय बढ़ाने व राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने धामी सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

सीटू से संबद्ध आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/सेविका कर्मचारी यूनियन ने गांधी पार्क में नारेबाजी कर बुलंद की आवाज, कहा- लंबे समय बाद भी कई मांगें पूरी नहीं हुई, प्रतिनिधिमंडल ने सीएम को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 15 सितंबर 2026ः

उत्तराखंड में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मानदेय सहित विभिन्न मांगों को लेकर धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को कार्यकर्ताओं ने गांधी पार्क में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। साथ ही न्यूनतम मानदेय भी 26 हजार रुपये दिया जाए। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने सीएम को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।

सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस) से संबद्ध आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/सेविका कर्मचारी यूनियन के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने गांधी पार्क में विभिन्न मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर न्यूनतम 26 हजार रुपये मानदेय समेत लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय की मांग की। यूनियन का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं सरकार की योजनाओं को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं, इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और अन्य जरूरी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। वक्ताओं ने मार्च 2024 के आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय बाद भी कई मांगें पूरी नहीं हुई हैं।

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राज्य कर्मचारी का दर्जा, ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा

मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को राज्य कर्मचारी घोषित करने और न्यूनतम 26 हजार रुपये मानदेय देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। यूनियन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ग्रेच्युटी एवं सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने और केंद्र सरकार के शासनादेश के अनुरूप उत्तराखंड में भी 45 दिन का मातृत्व अवकाश लागू करने की मांग की। साथ ही बीमारी की स्थिति में 20 दिन के आकस्मिक अवकाश की सीमा खत्म होने के बाद अतिरिक्त 10 दिन का मानदेय सहित चिकित्सा अवकाश देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

दूसरे विभागों का काम लेने पर अलग से भुगतान

कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनसे बाल विकास विभाग के अतिरिक्त अन्य विभागों का काम न कराया जाए। यदि अन्य विभागों का काम लिया जाता है तो उसके लिए अलग से अतिरिक्त मानदेय दिया जाए। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों के किराये की राशि मकान मालिक के खाते में भेजने के बजाय माता समिति अथवा कार्यकर्ता के खाते में देने, करीब पांच वर्षों से बंद केंद्र पंजीकरण व्यवस्था फिर शुरू करने और स्कूलों की तर्ज पर ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन अवकाश देने की मांग उठाई गई।
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दो मांगों पर मिली तत्काल राहत

प्रदर्शन से पहले आईसीडीएस निदेशक ने यूनियन प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया। यूनियन के मुताबिक वार्ता में उनकी मांग पर राशन कार्डों के सत्यापन का काम नहीं कराने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा रजिस्टर और अन्य सामग्री लेने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को वर्ष में 2,000 रुपये देने के आदेश भी किए गए। विरोध प्रदर्शन में सीटू के जिला महामंत्री लेखराज, जिला अध्यक्ष एसएस नेगी, सचिव हिमांशु चौहान, बस्ती बचाओ आंदोलन के संयोजक अनंत आकाश, आशा स्वास्थ्य कार्यकर्ता कर्मचारी यूनियन की प्रांतीय अध्यक्ष शिवा दुबे, चित्रकला, लक्ष्मी पंत, ज्योतिका पांडे और रजनी गुलेरिया, सुनीता रावत, मनीषा राणा, ऊषा भंडारी, सीमा सिंह, आशा नेगी, शीला बहुगुणा, पूनम सिंह, अंजली, सोमबाला, कलावती चंदोला मौजूद रहीं।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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