
लखनऊ, 16 सितंबर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में बुधवार को Gen Z के मुद्दों और उनकी आवाज को एक साझा मंच मिला। आइसा के देशव्यापी GenZ Rising अभियान के तहत शहीद स्मारक और रेजीडेंसी के पास गांधी भवन में आयोजित ‘Lucknow with GenZ’ कार्यक्रम में छात्रों, युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और राजनीतिक व्यंग्यकारों ने शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए।

यह कार्यक्रम GEN-Z महाजुटान यात्रा का हिस्सा था। आयोजकों के मुताबिक अभियान का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर चल रहे छात्र-युवा संघर्षों को एक साझा मंच पर लाना है। परीक्षा में अनियमितताओं, पेपर लीक, भर्तियों में देरी, बेरोजगारी और बढ़ती शिक्षा लागत जैसे मुद्दों को लेकर हाल के छात्र आंदोलनों के बाद यह अभियान प्रदेश के कई शहरों से होकर गुजर रहा है।
भारत में हजारों जंतर-मंतर सुलग रहे और उठ खड़े होने को तैयार : नेहा
सभा में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि देशभर में हजारों ‘जंतर-मंतर’ सुलग रहे हैं। उनके मुताबिक कहीं छात्र पेपर लीक के खिलाफ लड़ रहे हैं तो कहीं युवा बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर हैं। बढ़ती शिक्षा लागत और जवाबदेही से बचते तंत्र के खिलाफ भी आवाज उठ रही है। उन्होंने कहा कि GenZ Rising इन बिखरे संघर्षों को जोड़कर इस पीढ़ी के गुस्से, आकांक्षाओं और सवालों को लोकतांत्रिक आवाज देने की कोशिश है।
आइसा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मनीष कुमार ने पेपर लीक, भर्ती में देरी, बेरोजगारी और सार्वजनिक शिक्षा के संकट को युवाओं की प्रमुख चिंताओं से जोड़ा। उन्होंने कहा कि ये अलग-अलग लड़ाइयां नहीं हैं अपितु शिक्षा, रोजगार, सम्मान और न्याय के व्यापक सवालों से जुड़ी हैं। RYA उत्तर प्रदेश के सचिव सुनील मौर्य ने कहा कि युवाओं के सामने सवाल केवल नौकरी पाने का ही नहीं है। सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन बनाने का भी मुद्दा है।
कार्यक्रम में राजनीतिक व्यंग्य और डिजिटल संवाद भी चर्चा के केंद्र में रहा। डॉ. मेडुस्सा ने व्यंग्य को सत्ता और सामाजिक पूर्वाग्रहों से सवाल करने का लोकतांत्रिक माध्यम बताया। मेघनाद ने युवाओं में राजनीतिक चेतना बढ़ाने और ऑनलाइन सूचनाओं को आलोचनात्मक नजर से परखने की जरूरत पर जोर दिया। पत्रकार दिव्या ने छात्रों और युवाओं के अनुभवों तथा संघर्षों को सार्वजनिक बहस में जगह देने में पत्रकारिता की भूमिका रेखांकित की।

सामाजिक कार्यकर्ता इरफान ने शिक्षा और रोजगार के सवालों को समानता, सम्मान और सामाजिक न्याय से जोड़कर देखने की बात कही। वहीं राजनीतिक व्यंग्यकार अस्वमित ने युवाओं के राजनीतिक संवाद और सार्वजनिक जीवन में डिजिटल प्लेटफॉर्म, हास्य और व्यंग्य की बढ़ती भूमिका पर बात रखी।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि छात्रों और युवाओं की समस्याओं को महज अस्थायी असंतोष मानने के बजाय शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और संस्थागत जवाबदेही के सवालों के रूप में देखा जाना चाहिए। लखनऊ का यह आयोजन GenZ Rising अभियान के तहत एक खुले सार्वजनिक मंच के रूप में सामने आया, जहां युवाओं को अपने भविष्य को प्रभावित करने वाले सवालों पर बोलने और संवाद करने का अवसर मिला।






