
लखनऊ, 17 सितंबर 2026:
यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच दलित राजनीति में एक नया चेहरा तेजी से सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर गंभीर आरोप लगाकर चर्चा में आईं डॉ. रोहिणी घावरी स्विट्जरलैंड से लौटने के बाद लगातार पश्चिमी यूपी से लेकर लखनऊ तक राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रही हैं। उनकी सक्रियता को खास तौर पर वाल्मीकि समाज के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मुहिम से जोड़कर देखा जा रहा है।
रोहिणी की सक्रियता ऐसे समय बढ़ी है जब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर यूपी में जातीय और सामाजिक समीकरणों पर राजनीतिक दलों की नजर है। मेरठ में उन्होंने वाल्मीकि समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण में वर्गीकरण का मुद्दा उठाया। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों में वाल्मीकि समाज की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग भी रखी है।
लखनऊ पहुंचने के बाद रोहिणी ने करणी सेना के कार्यक्रम में हिस्सा लिया जहां उन्हें ‘झांसी की रानी’ की उपाधि देकर तलवार भेंट की गई। इसके बाद करणी सेना अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू के साथ उन्होंने सुभासपा अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर से मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हुईं।हालांकि राजभर की ओर से इसे जन्मदिन की शुभकामना देने के लिए हुई मुलाकात बताया गया और राजनीतिक चर्चा से इनकार किया गया है।
रोहिणी की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वाल्मीकि समाज के बीच लगातार संपर्क नजर आ रहा है। दिल्ली और पश्चिमी यूपी के बाद लखनऊ में भी उन्होंने समाज के लोगों से मुलाकात की। गुरुग्राम में हड़ताल कर रहे सफाईकर्मियों से मुलाकात और मेरठ में वाल्मीकि समाज के कार्यक्रम में भागीदारी के बाद अब वह सामाजिक मुद्दों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़ रही हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि आने वाले समय में कई राजनीतिक दलों से संवाद किया जा सकता है।

रोहिणी खुद चुनाव लड़ने के बजाय वाल्मीकि समाज के लोगों को चुनाव लड़ाने और उन्हें राजनीतिक हिस्सेदारी दिलाने की बात कह चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि जो दल आरक्षण में वर्गीकरण के साथ समाज को टिकट और संगठन में हिस्सेदारी देगा उसके साथ जाने पर विचार किया जाएगा। पश्चिमी यूपी की करीब 21 सीटों पर सक्रियता की चर्चा के बीच आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, अलीगढ़ और कानपुर जैसे क्षेत्रों का नाम सामने आ रहा है। हालांकि किसी खास राजनीतिक दल के साथ उनके औपचारिक गठजोड़ की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
चंद्रशेखर आजाद पर हमले से बढ़ी सियासी चर्चा
रोहिणी और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के बीच विवाद पहले से ही सार्वजनिक चर्चा का विषय रहा है। भारत लौटने के बाद रोहिणी ने चंद्रशेखर के खिलाफ कानूनी लड़ाई चलने की बात कही और उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने चंद्रशेखर के ‘अंबेडकरवादी’ होने के दावे पर भी सवाल उठाए। इन आरोपों को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के स्तर पर होना है।

अब रोहिणी का फोकस केवल चंद्रशेखर पर लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं दिख रहा। वाल्मीकि समाज के बीच राजनीतिक हिस्सेदारी, आरक्षण वर्गीकरण और संगठन खड़ा करने की उनकी कोशिशें 2027 के चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी की दलित राजनीति में एक अलग धुरी बनाने की दिशा में कदम के तौर पर देखी जा रही हैं।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रोहिणी घावरी की यह सक्रियता किसी राजनीतिक दल के साथ औपचारिक रूप लेगी या वह अलग सामाजिक-राजनीतिक मंच के जरिए वाल्मीकि समाज को लामबंद करेंगी? फिलहाल इसका जवाब साफ नहीं है लेकिन उनकी लगातार बढ़ती गतिविधियों ने यूपी की चुनावी राजनीति में चर्चा जरूर तेज कर दी है।
कल लखनऊ में हुई स्वाभिमान संकल्प कार्यक्रम की कुछ ख़ास तस्वीरें देखिए जिसने सभी राजनेताओं के होश उड़ा रखे है की आगे क्या होने वाला है उत्तर प्रदेश में !!
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— Dr Rohini Ghavari ( रोहिणी ) (@DrRohinighavari) September 16, 2026






