
लखनऊ, 17 सितंबर 2026:
यूपी की राजधानी के लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे गोमती पुस्तक महोत्सव में गुरुवार को युवाओं के भविष्य, कौशल और राष्ट्र निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण संवाद हुआ। विशेष सत्र ‘कूटनीति से नेतृत्व तक-राष्ट्र सर्वोपरि’ में दिल्ली के उपराज्यपाल एवं पूर्व राजनयिक सरदार तरनजीत सिंह संधू ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि बदलती दुनिया में केवल डिग्री के भरोसे आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को पढ़ने की आदत, आधुनिक कौशल, अनुशासन और समाज व राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करनी होगी। सत्र के दौरान संधू के जीवन, व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान पर केंद्रित वीडियो भी प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में युवराज मलिक, प्रो. जयप्रकाश सैनी और सरदार तरनजीत सिंह संधू मंच पर उपस्थित रहे।
पढ़ने से मिलती है सोचने की ताकत
संधू ने कहा कि गोमती पुस्तक महोत्सव केवल किताबों और साहित्य का आयोजन नहीं है। यह नए विचारों, विद्वानों और समाज को दिशा देने वाले संवाद का मंच है। उनके अनुसार पढ़ना सिर्फ सूचना हासिल करने का माध्यम नहीं अपितु सोचने, समझने और नए विचार विकसित करने की क्षमता को मजबूत करता है। व्यस्त जीवनशैली में पढ़ने के लिए समय निकालना चुनौती बन रहा है, इसलिए पुस्तकों का महत्व और बढ़ गया है।
उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलों से जुड़ने की सलाह दी। कहा कि खेल टीम भावना और अनुशासन सिखाते हैं। जीवन में असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर लगातार आगे बढ़ना चाहिए।

36 साल की विदेश सेवा का अनुभव साझा किया
अपने विदेश सेवा के अनुभव साझा करते हुए संधू ने बताया कि उन्होंने 36 वर्ष विदेश सेवा में काम किया। अमेरिका और जर्मनी सहित विभिन्न देशों में कार्य के दौरान उन्हें अलग-अलग समाज, व्यवस्थाओं और नीतियों को समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है। ऐसे दौर में डिग्री के साथ बदलती जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करना जरूरी है। युवाओं को यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि भविष्य में किन क्षेत्रों और कौशलों की मांग बढ़ेगी।
AI मददगार है, फैसला आपका होना चाहिए
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर संधू ने कहा कि तकनीक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। युवाओं को एआई का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करना चाहिए लेकिन अपनी सोच और निर्णय लेने की क्षमता को पूरी तरह तकनीक पर निर्भर नहीं करना चाहिए। उन्होंने समाज के अलग-अलग वर्गों, शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद जारी रखने की जरूरत भी बताई।
तेजा सिंह समुंदरी से लेकर प्रेमचंद तक का जिक्र
संधू ने सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन और स्वतंत्रता संघर्ष में उनके योगदान का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से ऐसे व्यक्तित्वों के बारे में पढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने लखनऊ की साहित्यिक विरासत का जिक्र करते हुए प्रेमचंद और भगवती चरण वर्मा जैसे साहित्यकारों को भी याद किया।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल तकनीक से नहीं अपितु भारतीय परंपरा, संस्कृति, साहित्य, ज्ञान और मूल्यों के साथ आधुनिक कौशल के समन्वय से होगा। युवाओं को अपनी क्षमता का इस्तेमाल समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए करना चाहिए।
तीन पुस्तकों का अनावरण, प्रतिभागी विद्यार्थी सम्मानित
कार्यक्रम में अतिथियों ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की प्रकाशित तीन पुस्तकों का अनावरण किया। इनमें सरदार तेजा सिंह समुंदरी के जीवन और योगदान पर आधारित पुस्तक भी शामिल रही। महोत्सव के आयोजन में योगदान देने वाले चंद्र प्रकाश, प्रो. रोली मिश्रा और सुश्री सांत्वना तिवारी को सम्मानित किया गया। विभिन्न गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को भी स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।






