
लखनऊ, 17 सितंबर 2026:
UP Assembly Elections से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। दलों में नेताओं की आवाजाही के बीच गुरुवार को समाजवादी पार्टी ने भाजपा के खेमे से राम आश्रय कुशवाहा की वापसी कराकर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी। कई बार मंत्री रह चुके कुशवाहा ने करीब 13 साल बाद सपा में वापसी की और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लिया। उनके साथ भाजपा व अन्य दलों के नेता भी साइकिल पर सवार हुए।
लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में सदस्यता ग्रहण करने के बाद राम आश्रय कुशवाहा ने कहा कि उन्हें आज भी ऐसा महसूस होता है कि ‘नेताजी’ (मुलायम सिंह) उनके बीच मौजूद हैं। उन्होंने अखिलेश यादव को भी वही पदवी और सम्मान मिलने की बात कही। कुशवाहा ने समर्थकों से अपील की कि जब तक अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे तब तक घर नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि जहां सम्मान होता है, वहीं रिश्ता और सहयोग कायम रहता है।
राम आश्रय कुशवाहा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी से की थी। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी में आए और संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह सपा के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे। बाद में भाजपा में शामिल हो गए। अब विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा छोड़कर फिर सपा का दामन थाम लिया है।
विश्वकर्मा जयंती पर छुट्टी का ऐलान
कुशवाहा की ज्वाइनिंग के बाद अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर भगवान विश्वकर्मा जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही विश्वकर्मा समाज के उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जाएंगे। अखिलेश ने रिवरफ्रंट पर भगवान विश्वकर्मा के मंदिर के निर्माण की भी बात कही।

एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सरकार को घेरा
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में निर्माण पूरा होने से पहले ही काम में खामियां सामने आने लगती हैं। उन्होंने बुंदेलखंड और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए अपने कार्यकाल में बने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उदाहरण दिया।
रोजगार और UPI शुल्क पर भी निशाना
अखिलेश ने रोजगार के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने जुलाई और अगस्त में नौकरियों के मोर्चे पर उपलब्धि नहीं होने का दावा किया और सितंबर को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सपा की सरकार बनने पर युवाओं को रोजगार और नौकरियां देने के लिए काम किया जाएगा।
वहीं UPI पर प्रस्तावित शुल्क को लेकर भी अखिलेश ने सरकार पर निशाना साधा। इसे लोगों से पैसे लेने वाली योजना बताते हुए इसे बंद करने की मांग की।
UPI शुल्क व्यवस्था को लेकर हालिया रिपोर्टों के मुताबिक 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI लेनदेन पर MDR लागू होने की व्यवस्था है जबकि छोटे कारोबारियों के लिए कुछ छूट भी प्रस्तावित है। राम आश्रय कुशवाहा की सपा में वापसी और अखिलेश यादव के एक साथ कई मुद्दों पर सरकार को घेरने से गुरुवार को लखनऊ का सपा कार्यालय यूपी की चुनावी राजनीति के लिहाज से खासा सक्रिय नजर आया।






