
लखनऊ, 20 सितंबर 2026:
UP Assembly Elections 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी में संगठन और उत्तराधिकार को लेकर चल रही उठापटक ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने परिवार को लेकर अपना रुख एक बार फिर साफ करते हुए भतीजे आकाश आनंद और उनकी बहन (दीपिका आनंद) को पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी से दूर रखने का ऐलान किया है। वहीं, अपने भाई आनंद कुमार के परिवार से अब केवल ईशान आनंद को संगठन में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाने की बात कही है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब 23 सितंबर को बसपा की अहम ऑल इंडिया बैठक होने जा रही है।
मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले का विस्तार से बचाव किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में सफलता और समाज के लिए काम करने को परिवार और करीबी रिश्तों के मोह से ऊपर उठना जरूरी है। उन्होंने बसपा संस्थापक कांशीराम के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने नजदीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से दूरी बनाए रखी और संगठन में निस्वार्थ भाव से काम करने को प्राथमिकता दी।
मायावती ने आकाश आनंद को लेकर अपना रुख भी बेहद कड़ा रखा। उनके मुताबिक आकाश की शादी के बाद उनकी गतिविधियों और रवैये के कारण उन्हें पार्टी से अलग करना पड़ा। मायावती ने आरोप लगाया कि आकाश अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में हैं। ऐसे में उन्हें दोबारा पार्टी में लाना संगठन के लिए विश्वासघात होगा। इससे पहले सितंबर में आकाश को पहले राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया और बाद में पार्टी से पूरी तरह अलग कर दिया गया था।
दिलचस्प यह है कि ईशान आनंद को लेकर मायावती का रुख भी पिछले कुछ दिनों में कई बार बदला है। पिछले दिनों ही उन्होंने दोनों भतीजों आकाश और ईशान को राजनीतिक जिम्मेदारी से दूर रखने की बात कही थी और जरूरत पड़ने पर दीपिका को जिम्मेदारी देने की संभावना जताई थी। अब ताजा फैसले में दीपिका को भी संगठनात्मक जिम्मेदारी से दूर रखते हुए ईशान को आगे करने का निर्णय लिया गया है।
1. आज मेरा पुनः पार्टी के लोगों से यही कहना है कि मेरे ख़ुद के अनुभव को मद्देनज़र रखते हुये यदि इनको राजनीति में कामयाब होना है और समाज के लिए कुछ करना है तो उन्हें मेरी तरह अपने भाई-बहिनों व नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि के मोह से ऊपर उठकर अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से कार्य करना…
— Mayawati (@Mayawati) September 20, 2026
हालांकि मायावती ने ईशान को भी पूरी तरह खुली छूट नहीं दी है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ईशान ने पार्टी विरोधी कोई गंभीर गतिविधि की तो उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी अपितु पार्टी के किसी मिशनरी और वफादार दलित कार्यकर्ता को आगे लाने की बात कही गई है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यही माना जा रहा है कि 2027 के चुनाव से पहले मायावती संगठन पर अपना सीधा नियंत्रण बनाए रखने और परिवार आधारित नेतृत्व की संभावित आलोचनाओं से दूरी बनाने पर जोर दे रही हैं। कुछ सप्ताह में आकाश आनंद को लेकर हुए लगातार फैसलों और 23 सितंबर की प्रस्तावित ऑल इंडिया बैठक ने बसपा के भीतर नेतृत्व और संगठन की दिशा को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
मायावती ने अपने फैसले को डॉ. भीमराव आंबेडकर के 1956 में अपने पुत्र यशवंत आंबेडकर को लिखे पत्र के संदर्भ से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संस्था और आंदोलन को निजी परिवार की तरह नहीं चलाया जा सकता। अंत में मायावती ने दो टूक कहा कि उनका असली परिवार पूरा बहुजन समाज है। उसे सत्ता की ‘मास्टर चाबी’ के जरिए शोषित से शासक वर्ग बनाना उनका मिशन है। ऐसे में 23 सितंबर की बैठक अब केवल संगठनात्मक बैठक नहीं अपितु 2027 से पहले बसपा के अंदर नेतृत्व, अनुशासन और परिवार की भूमिका पर मायावती के अगले कदम के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।






