
अनिल निषाद
अयोध्या, 27 सितंबर 2026:
पितृ पक्ष की शुरुआत के साथ ही रामनगरी अयोध्या में रविवार को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने सरयू में आस्था की डुबकी लगाई और पुरोहितों के मार्गदर्शन में अपने पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किया। सरयू तट के नया घाट से लेकर अयोध्या से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित भरत कुंड तक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठान होते रहे।
नया घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। स्नान के बाद लोगों ने पुरोहितों के निर्देशन में अपने पूर्वजों को स्मरण किया और उनकी आत्मा की शांति तथा मोक्ष की कामना के साथ पिंडदान और तर्पण किया। पुरोहितों ने वैदिक मंत्रों के बीच विधि-विधान से श्राद्ध कर्म कराया। पितृ पक्ष शुरू होने के साथ अयोध्या के प्रमुख घाटों और आसपास के धार्मिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियां भी बढ़ गई हैं।
पितरों के लिए अयोध्या क्यों खास?
सनातन परंपरा में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों पितरों का स्मरण कर तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध कर्म कराने के लिए धार्मिक और पौराणिक स्थलों का रुख करते हैं।
अयोध्या का पितृ कर्म की दृष्टि से भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने अपने पिता महाराज दशरथ के निधन के बाद उनके निमित्त श्राद्ध और पिंडदान किया था। इसी परंपरा से अयोध्या और आसपास के कई तीर्थ स्थलों को जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धालुओं की आस्था है कि पवित्र अयोध्या में सरयू स्नान के बाद पितरों का तर्पण और पिंडदान धार्मिक पुण्य प्रदान करता है।
भरत कुंड में भी शुरू हुआ पिंडदान
रामनगरी से करीब 20 किलोमीटर दूर भरत कुंड में भी पितृ पक्ष के पहले दिन श्रद्धालु पहुंचे। यहां पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान और तर्पण की प्रक्रिया संपन्न कराई। श्रद्धालुओं ने पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। भरत कुंड का धार्मिक महत्व भगवान श्रीराम के वनवास और भरत से जुड़े प्रसंगों से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि पितृ पक्ष के दौरान यहां भी श्रद्धालुओं की विशेष आस्था देखने को मिलती है।
मृत्यु तिथि के अनुसार होगा श्राद्ध
पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धालु अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करेंगे। जिन लोगों को पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, वे परंपरा के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध और तर्पण करते हैं। आने वाले दिनों में नया घाट और भरत कुंड पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। पितृ पक्ष के साथ रामनगरी में सरयू तट से लेकर तीर्थ स्थलों तक पूर्वजों के स्मरण, तर्पण और पिंडदान की प्राचीन धार्मिक परंपरा एक बार फिर जीवंत होती दिखाई दे रही है।






