
लखनऊ, 2 अक्टूबर 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में LIC Fraud Case में CBI Court ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। कोर्ट ने LIC ट्रांसगोमती ब्रांच के तत्कालीन हायर ग्रेड असिस्टेंट पंकज सक्सेना को 10 साल की कठोर कैद की सजा दी है। उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मामले में शामिल तीन अन्य आरोपियों प्रेम शंकर उपाध्याय, रेखा उपाध्याय और मनीष सक्सेना को तीन-तीन साल की कैद की सजा मिली है।
फर्जी पॉलिसीधारकों के नाम पर निकाला पैसा
CBI के मुताबिक, यह मामला फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के बीच का है। आरोप था कि आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर ऐसे पॉलिसीधारकों के नाम इस्तेमाल किए जो असल में मौजूद ही नहीं थे। इनके नाम पर फर्जी Payment Vouchers तैयार किए गए। इसके बाद चेक के जरिए LIC के फंड को दूसरी जगह ट्रांसफर किया गया।
LIC को 6.37 करोड़ रुपये का नुकसान
जांच में सामने आया कि इस तरीके से LIC को करीब 6,37,66,660 रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा। CBI ने इस मामले को LIC ट्रांसगोमती ब्रांच, जानकीपुरम, लखनऊ के तत्कालीन चीफ मैनेजर की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था।
CBI Court Awards 10 Years Rigorous Imprisonment to LIC Assistant in Rs. 6.37 Crore Fraud Case
Three Private Persons Sentenced to Three Years RI in the Case pic.twitter.com/hPGtaKAxDW
— Central Bureau of Investigation (India) (@CBIHeadquarters) October 1, 2026
2012 में दर्ज हुई थी CBI FIR
CBI ने 13 अगस्त 2012 को केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान LIC ट्रांसगोमती ब्रांच से जुड़े रिकॉर्ड और मामले में आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की गई। जांच पूरी होने के बाद CBI ने 21 अगस्त 2014 को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
सरकारी कर्मचारी को 10 साल की कैद
CBI Court ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद पंकज सक्सेना को दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसे 10 साल की कठोर कैद के साथ 5 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। पंकज सक्सेना उस समय LIC की ट्रांसगोमती ब्रांच में हायर ग्रेड असिस्टेंट के पद पर तैनात था। मामले में प्रेम शंकर उपाध्याय, रेखा उपाध्याय और मनीष सक्सेना को भी दोषी ठहराया गया। तीनों को तीन-तीन साल की कठोर कैद की सजा मिली है। कोर्ट ने प्रत्येक आरोपी पर 1.25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
ट्रायल के बाद आया फैसला
CBI ने चारों आरोपियों के खिलाफ जांच के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। ट्रायल के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने चारों को दोषी माना। इसके बाद सजा का आदेश जारी किया गया।






