SIR : उत्तराखंड में वोट काटने की साजिश, कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर बोला हमला, 96,704 फॉर्म-7 पर उठाए सवाल
एसआईआर समिति का आरोप, 26-27 जुलाई से ही कुछ क्षेत्रों में फॉर्म-7 के जरिए पात्रों के नाम काटने के असामान्य मामले आने लगे थे सामने, नो मैप्ड संबंधी नोटिस का जवाब न देने वाले मतदाताओं के खिलाफ सिस्टम ने स्वतः फॉर्म-7 कर लिए तैयार,

राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 5 अक्टूबर 2026ः
उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर हमला बोला है। उत्तराखंड कांग्रेस की एसआईआर समिति ने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया पात्र मतदाताओं के नाम काटने, मतदाताओं को परेशान करने और वोट चोरी का रास्ता खोलने वाली साबित हुई है। पार्टी ने दावा किया कि उसने समय रहते फर्जी फॉर्म-7 और नाम काटे जाने के कई मामलों का खुलासा किया। कांग्रेस भवन में मीडिया से बातचीत में समिति के अध्यक्ष व पूर्व विधायक मनोज रावत ने कहा कि 26-27 जुलाई से ही कुछ विधानसभा क्षेत्रों में फॉर्म-7 के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम काटने के असामान्य मामले सामने आने लगे थे। 13 अगस्त तक ऐसे मामलों की संख्या हजारों में पहुंच गई।
एक आपत्तिकर्ता ने अकेले करीब 6,500 फॉर्म-7 किए दाखिल
कांग्रेस का दावा है कि एक आपत्तिकर्ता ने अकेले करीब 6,500 फॉर्म-7 दाखिल किए, जबकि ऐसे दर्जनों आपत्तिकर्ता सामने आए। कांग्रेस के मुताबिक राज्य में 96,704 आपत्तिकर्ताओं ने फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया, लेकिन पार्टी के विरोध और कानूनी अभियान के बाद केवल 7,523 नाम ही हटाए जा सके। कांग्रेस ने सबसे गंभीर सवाल 97,186 मतदाताओं को लेकर उठाया है। पार्टी का आरोप है कि तार्किक विसंगतियों और नो मैप्ड संबंधी नोटिस का जवाब नहीं देने वाले इन मतदाताओं के खिलाफ सिस्टम ने स्वतः फॉर्म-7 तैयार कर दिए और अंतिम चरण में उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इन मतदाताओं को पर्याप्त सुनवाई का अवसर भी नहीं मिला।
हरिद्वार ग्रामीण के बूथ का मामला बना बड़ा मुद्दा
कांग्रेस ने हरिद्वार ग्रामीण के बूथ संख्या 65 का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां 123 पात्र मतदाताओं के नाम काट दिए गए, जबकि जांच में ये मतदाता उसी बूथ पर मौजूद मिले और उन्होंने बीएलओ को आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध कराए थे। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि फर्जी फॉर्म-7 के खिलाफ कार्रवाई न होना और अंतिम समय में स्वतः सृजित फॉर्म-7 के आधार पर नाम हटाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पार्टी ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वह उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।
एसआईआर समिति ने पिछले वर्षों में मतदाताओं की संख्या में हुए बड़े उतार-चढ़ाव का हवाला देते हुए पूरी प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की है। हालांकि कांग्रेस ने एसआईआर में लगे बीएलओ, कर्मचारियों और अधिकारियों, विशेषकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की कार्यकुशलता की सराहना की। इस मौके पर एसआईआर समिति के सदस्य अमेंद्र बिष्ट और संदीप चमोली, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र भंडारी व मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी मौजूद रहे।






