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Nana Patekar Death: नहीं रहे बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर, ‘परिंदा’ से ‘क्रांतिवीर’ तक निभाए यादगार किरदार

45 मिनट तक CPR के बाद भी नहीं बची जान, 1 BHK में गुजारी जिंदगी, 27 एकड़ के फार्महाउस के मालिक थे, 75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से निधन, 13 साल की उम्र में शुरू हुआ था संघर्ष, करोड़ों की संपत्ति के बावजूद सादगी से जीते रहे, बेस्ट एक्टर व पद्मश्री अवार्ड भी मिला

एंटरटेनमेंट डेस्क, 8 अक्टूबर 2026:

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 5:20 बजे 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें घर पर गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था। मेडिकल टीम ने करीब 45 मिनट तक लगातार CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें होश में नहीं लाया जा सका। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर है। मामले में मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम किया जाएगा।

13 साल की उम्र में शुरू हुआ संघर्ष

नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उनका असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनके पिता गजानन पाटेकर कपड़े का कारोबार करते थे और मां निर्मला पाटेकर गृहणी थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति एक समय अच्छी थी, लेकिन एक करीबी के धोखे के बाद परिवार की संपत्ति और जमा-पूंजी खत्म हो गई। इसके बाद परिवार की आर्थिक हालत इतनी खराब हो गई कि नाना को महज 13 साल की उम्र में काम करना पड़ा। स्कूल के बाद वह कई किलोमीटर पैदल चलकर फिल्मों के पोस्टर पेंट करते थे। इसके बदले उन्हें महीने के 35 रुपये और खाना मिलता था। नाना अक्सर कहते थे कि संघर्ष और उस दौर का अपमान उन्हें अभिनय की ऐसी सीख दे गया, जो किसी एक्टिंग स्कूल से नहीं मिल सकती थी।

‘गमन’ से शुरू हुआ फिल्मी सफर

नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अभिनय की शुरुआत की। हालांकि, ‘परिंदा’ से उन्हें व्यापक पहचान मिली। इस फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का नेशनल फिल्म अवॉर्ड और फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। इसके बाद ‘अंगार’ में अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट विलेन अवॉर्ड मिला। 1994 में आई ‘क्रांतिवीर’ उनके करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में रही। इस फिल्म के लिए उन्हें 1995 में बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। इसके अलावा उन्हें फिल्मफेयर और स्क्रीन अवॉर्ड भी मिले।

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मराठी व हिंदी फिल्मों के लिए मिले पुरस्कार

नाना ने ‘अग्नि साक्षी’, ‘अपहरण’, ‘अब तक छप्पन’ और मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ में भी दमदार भूमिकाएं निभाईं। ‘अग्नि साक्षी’ के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला, जबकि ‘अपहरण’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट विलेन अवॉर्ड मिला। 2017 में ‘नटसम्राट’ के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर मराठी अवॉर्ड मिला। वेलकम जैसी शुद्ध कमर्शियल फिल्मों से उन्होंने मंझे हुए हास्य अभिनेता की झलक भी दी। 2026 में अपनी फिल्म सूबेदार व ओ रोमियो तक वो सक्रिय रहे।

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करोड़ों की संपत्ति, फिर भी 1 BHK में रहते थे

नाना पाटेकर ने फिल्मों से करोड़ों रुपये कमाए, लेकिन उनकी जीवनशैली हमेशा सादगी भरी रही। एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति करीब 80 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई थी और वह एक फिल्म के लिए करीब 2 से 3 करोड़ रुपये फीस लेते थे। इसके बावजूद मुंबई के अंधेरी इलाके में वह करीब 750 वर्गफीट के 1 BHK फ्लैट में रहते थे। बताया जाता है कि उन्होंने यह घर कई दशक पहले करीब 1.1 लाख रुपये में खरीदा था, जिसकी कीमत बाद में करीब 3 करोड़ रुपये बताई गई। वह पहले अपनी मां के साथ यहां रहते थे। मां के निधन के बाद जब भी मुंबई में होते, अकेले रहते थे।
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27 एकड़ का फार्महाउस, खेती से भी जुड़ाव

नाना पाटेकर के पास पुणे के पास खड़कवासला में 27 एकड़ का फार्महाउस भी था। यहां सात कमरे, लकड़ी का साधारण इंटीरियर और टेराकोटा की फर्श बताई गई है। वह यहां गेहूं और धान की खेती करते थे और फसल से होने वाली कमाई किसानों और मजदूरों में बांट देते थे। इसके अलावा पुणे के लॉ कॉलेज रोड पर उनका एक मकान और गोवा में आधुनिक डिजाइन का घर था। उनका पैतृक स्थान मुरुड में भी संपत्ति बताई गई है।

निजी जिंदगी को हमेशा रखा दूर

नाना पाटेकर ने 1978 में नीलकंती पाटेकर से शादी की थी। बाद में दोनों अलग हो गए। उनके दो बेटे हुए, जिनमें से एक का बचपन में ही निधन हो गया था। उनके जीवित बेटे का नाम मल्हार पाटेकर है। नाना अपनी निजी जिंदगी को हमेशा मीडिया की चकाचौंध से दूर रखते थे। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था। फिल्मों के अलावा लेखन, निर्देशन और कभी-कभार प्रोडक्शन से भी उनका जुड़ाव रहा। वह फिल्मों के चुनाव को लेकर काफी चुनिंदा माने जाते थे और उनकी पहचान फिल्मों की संख्या से ज्यादा उनके अभिनय की गहराई से बनी।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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