Navaratri : स्कंदमाता की आराधना से नारीशक्ति के सशक्तीकरण का संदेश, योगी बोले- बेटियों की शिक्षा में निवेश से संवरेगा प्रदेश का भविष्य
मुख्यमंत्री ने गिनाईं 2017 के बाद की उपलब्धियां, कहा- स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का सैचुरेशन 36 से बढ़कर 96 फीसदी पार, ड्रॉपआउट दर 20 से घटकर 3 प्रतिशत से नीचे पहुंची

लखनऊ, 15 अक्टूबर 2026:
सीएम योगी आदित्यनाथ ने मां भगवती के स्कंदमाता स्वरूप की आराधना को नारीशक्ति के सम्मान, स्वास्थ्य, शिक्षा और सशक्तीकरण से जोड़ते हुए कहा कि जब महिलाएं स्वस्थ, शिक्षित और समर्थ होती हैं तभी राष्ट्र का वर्तमान सुरक्षित और भविष्य उज्ज्वल बनता है। उन्होंने कहा कि मां स्कंदमाता का वात्सल्य, ममता और पोषण का स्वरूप समाज को माताओं के स्वास्थ्य और बेटियों के बेहतर भविष्य के प्रति संवेदनशील होने का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के माध्यम से वर्ष 2017 से पहले और उसके बाद प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य, बालिका शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं की स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय बेटियों को संबल देने के बजाय राजनीतिक कुनबे को पोषित करने पर ध्यान दिया गया। माताओं के स्वास्थ्य और बेटियों की शिक्षा की घोर उपेक्षा हुई तथा भ्रष्टाचार ने व्यवस्थाओं को प्रभावित किया। अस्पतालों की बदहाली, दवाओं की कमी और संस्थागत प्रसव की कमजोर व्यवस्था के कारण मातृ-शिशु मृत्यु दर भी चिंताजनक स्थिति में थी।
बेटी के जन्म से शिक्षा तक सुरक्षा का दावा
योगी ने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में डबल इंजन सरकार ने इस स्थिति को बदलने का प्रयास किया है। बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा और सुरक्षित मातृत्व तक समग्र सुरक्षा एवं कल्याण का तंत्र विकसित किया गया है, ताकि आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां बेटियों की प्रगति में बाधा न बनें।
वात्सल्य, ममता और पोषण की अधिष्ठात्री देवी माँ स्कन्दमाता की आराधना हमें यह पावन संदेश देती है कि जब नारीशक्ति स्वस्थ, शिक्षित और समर्थ होती है, तभी राष्ट्र का वर्तमान सुरक्षित और भविष्य उज्ज्वल होता है।
वर्ष 2017 से पहले बेटियों को संबल देने के बजाय पूर्ववर्ती सरकारें केवल अपने राजनीतिक कुनबे को पोषित करने में व्यस्त थीं।
प्रदेश में माताओं का स्वास्थ्य और बेटियों की शिक्षा घोर उपेक्षा एवं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई थी। अस्पतालों की बदहाली, दवाओं का अभाव और संस्थागत प्रसव की लचर व्यवस्था के कारण मातृ-शिशु मृत्यु दर चिंताजनक स्थिति में थी।
विगत साढ़े 9 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने इस स्थिति को बदलने का काम किया है।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 15, 2026
स्कूलों में सुविधाएं बढ़ीं, ड्रॉपआउट दर घटी
मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन कायाकल्प के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का सैचुरेशन 36 प्रतिशत से बढ़कर 96 प्रतिशत से अधिक हो गया है। वहीं, स्कूल छोड़ने की दर 20 प्रतिशत से घटकर तीन प्रतिशत से भी कम रह गई है। उन्होंने कहा कि अटल आवासीय विद्यालयों के जरिए श्रमिकों और वंचित वर्ग के बच्चों को आधुनिक आवासीय शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में कक्षा 12 तक पढ़ाई की सुविधा के विस्तार से छात्राओं को अपनी शिक्षा पूरी करने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि बेटियों की शिक्षा पर खर्च केवल वर्तमान की जरूरत पूरी करना नहीं अपितु उनके आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य को मजबूत करने वाला निवेश है।






