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कार्यशाला में योगी की हिदायत, बोले- दफ्तरों के चक्कर कटवाने वालों की खैर नहीं, काम से तय होगी अफसरों की तरक्की

लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के तहत लगी 'साधना श्रृंखला' की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला, आठ राज्यों व चार केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी हुए शामिल

लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026:

उत्तर प्रदेश में सरकारी अधिकारियों की तैनाती से लेकर प्रमोशन तक में उनके कामकाज को अहमियत देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ किया कि सही पद पर सही व्यक्ति की तैनाती जरूरी है। अधिकारियों के कार्य प्रदर्शन, उपलब्धियों को वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) से जोड़ने पर काम होगा। आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, उनकी समस्याओं का समय पर समाधान हो, इसे लोकसेवकों के काम का पैमाना बनाया जाएगा।

नागरिकों की संतुष्टि से तय होगी अफसरों की काबिलियत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ के लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के तहत आयोजित ‘साधना श्रृंखला’ की उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला में प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने तीन प्रमुख पहलों का जिक्र करते हुए रुपाम को एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने, पंचायतों व नगर निकायों के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के साथ सही व्यक्ति को सही जिम्मेदारी देने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यशाला में आठ राज्यों व चार केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी शामिल हुए।

‘ऑफिस-ऑफिस’ की तरह दफ्तरों में न भटके आम आदमी

योगी ने कहा कि किसी सामान्य काम के लिए नागरिक को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक भटकना पड़े, तो यह पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने ‘ऑफिस-ऑफिस’ धारावाहिक का उदाहरण देते हुए कहा कि पेंशन जैसे काम के लिए बुजुर्गों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ना प्रशासन की कार्यशैली की कमी दिखाता है। किसी बुजुर्ग, महिला, युवा या किसान को समय पर समाधान नहीं मिलता, तो लोक सेवा का मकसद पूरा नहीं होता। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिम्मेदार पद पर अयोग्य व्यक्ति का होना जितना खतरनाक है, उतना ही नुकसानदेह वहां किसी लापरवाह कर्मचारी का बने रहना भी है। कई कर्मचारी अपने अधिकारों व प्रमोशन को लेकर सजग रहते हैं, लेकिन जिम्मेदारियों के निर्वहन में वैसी गंभीरता नहीं दिखाते। ऐसे में जरूरी है कि उनकी कार्यक्षमता बढ़ाई जाए, जिम्मेदारियां तय हों और काम का नियमित मूल्यांकन किया जाए।

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रुपाम में बनेगा एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास आयोग से आग्रह किया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रुपाम) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने में सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि एआई, डेटा एनालिटिक्स व डिजिटल तकनीक से शासन के कामकाज में तेजी से बदलाव आ रहा है। अधिकारियों को नई तकनीक के इस्तेमाल के लिए तैयार करना जरूरी है।

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योगी ने कहा कि तकनीक से सरकारी प्रक्रियाएं आसान हो सकती हैं, फैसले लेने में मदद मिल सकती है, लेकिन जनता के प्रति संवेदनशीलता सेवा भाव से ही आएगी। प्रशिक्षण का मकसद सिर्फ प्रमाणपत्र हासिल करना नहीं है। इसकी असली सफलता इस बात से तय होगी कि आम नागरिक को कितनी बेहतर सेवा मिली और उसकी समस्या कितनी जल्दी हल हुई।

पंचायतों व नगर निकायों के कर्मचारियों पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने ग्राम पंचायतों, नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों व नगर निगमों में काम करने वाले कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय शासन की बुनियादी इकाइयां हैं। इनकी कार्यक्षमता बेहतर होगी, तभी सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकेगा। उन्होंने क्षमता विकास आयोग से अधिकारियों व कर्मचारियों की उपलब्धियों, कार्य प्रदर्शन और अच्छे कामों को एसीआर व प्रमोशन से जोड़ने की दिशा में काम करने को कहा। ‘राइट पर्सन फॉर द राइट रोल’ की अवधारणा के तहत कर्मचारी की योग्यता के मुताबिक जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया गया। इससे सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने में मदद मिलेगी।

यूपी के 19.26 लाख से ज्यादा कर्मचारी कर्मयोगी पोर्टल पर

योगी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू मिशन कर्मयोगी सरकारी कामकाज की संस्कृति बदलने का राष्ट्रीय अभियान है। उत्तर प्रदेश में 19.26 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत हैं। ये कर्मचारी अब तक करीब चार करोड़ प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं। प्रदेश के 334 से ज्यादा प्रशिक्षण संस्थान उन्नति पोर्टल से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण की सफलता केवल पंजीकरण या पूरे किए गए पाठ्यक्रमों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। यह देखना जरूरी है कि प्रशिक्षण के बाद अधिकारियों के फैसलों में कितना सुधार आया, सरकारी प्रक्रियाएं कितनी आसान हुईं और नागरिकों को सेवाएं मिलने में कितना समय बचा।

सड़क की ऊंचाई बढ़ी, लोगों का रास्ता बंद हुआ तो सामने आई कमी

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में सड़क निर्माण का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने एक सड़क को दो लेन से चार लेन करने का निर्देश दिया था। अभियंताओं ने सड़क की ऊंचाई करीब तीन मीटर बढ़ा दी, जिससे आसपास की घनी आबादी के लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया। शिकायत मिलने पर वह खुद मौके पर पहुंचे और सड़क को जरूरत के मुताबिक बनाने के निर्देश दिए। योगी ने कहा कि यह मामला सिर्फ निर्माण का नहीं, बल्कि व्यावहारिक समझ और आम लोगों की जरूरतों को जानने का था। डिग्री हासिल करने या नियुक्ति पत्र मिलने भर से कोई व्यक्ति दक्ष अभियंता या सक्षम अधिकारी नहीं बन जाता। काम के दौरान आने वाली चुनौतियों को समझना, नई तकनीक अपनाना और सही फैसला लेना भी जरूरी है।

उन्होंने बताया कि क्षमता विकास आयोग की स्थापना के बाद इसकी अध्यक्ष एस राधा चौहान से इस विषय पर चर्चा हुई थी। रुपाम को आधुनिक तकनीक व क्षमता विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल इसी सोच का हिस्सा है।

36 सेक्टोरल पॉलिसी से बदली प्रदेश की कार्यसंस्कृति

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने अलग-अलग क्षेत्रों में 36 सेक्टोरल पॉलिसी तैयार की हैं। क्षमता विकास व मिशन कर्मयोगी ने भी प्रशासनिक कार्यशैली में बदलाव लाने में भूमिका निभाई है। उन्नति पोर्टल के जरिए प्रशिक्षण संस्थान अपने अनुभव, विशेषज्ञता व बेहतर कामकाज के तरीके साझा कर सकते हैं। इससे दूसरे संस्थानों को भी सीखने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर नीतियों के साथ उन्हें जमीन पर लागू करने वाला सक्षम प्रशासन भी जरूरी है। अधिकारियों को नतीजों पर केंद्रित होकर काम करना होगा, ताकि नागरिकों की परेशानियां कम हों और उन्हें समय पर सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।

2017 से पहले की व्यवस्था पर भी साधा निशाना

योगी ने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के पास उपजाऊ जमीन, पर्याप्त जल संसाधन व बड़ी युवा आबादी जैसी ताकतें थीं, लेकिन लंबे समय तक इन संभावनाओं का पूरा इस्तेमाल नहीं हो सका। उनके मुताबिक, उस दौर में प्रदेश की पहचान उपद्रवग्रस्त राज्य के रूप में बन गई थी। शासन व्यवस्था में आम नागरिक की जरूरतों के बजाय सत्ता को प्राथमिकता मिलती थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय सरकारी नौकरी के विज्ञापन निकलने पर युवाओं को चयन प्रक्रिया में सिफारिश व लेनदेन की आशंका रहती थी। उन्हें पारदर्शी तरीके से नौकरी मिलने का भरोसा नहीं था। उन्होंने दावा किया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, बजट व प्रति व्यक्ति आय तीन गुना हुई है।

एक्सप्रेसवे, आवास व कृषि को लेकर सरकार के दावे

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश के पास करीब डेढ़ एक्सप्रेसवे थे, जबकि अब देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा प्रदेश में है। उन्होंने सड़क, रेल व हवाई संपर्क के विस्तार, देश की पहली रैपिड रेल सेवा और सात शहरों में मेट्रो संचालन का भी जिक्र किया। योगी के मुताबिक, प्रदेश में 65 लाख गरीब परिवारों को आवास दिए गए हैं, तीन करोड़ से ज्यादा परिवारों के घरों में शौचालय बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 15 करोड़ से अधिक लोगों को राशन मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस अवधि में प्रदेश में भूख से किसी की मौत नहीं हुई और सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचा। मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड व विंध्य क्षेत्र में हर घर नल योजना, सभी 75 जिलों में बिजली की उपलब्धता, कृषि विकास दर आठ प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत होने के साथ गन्ना किसानों को नियमित भुगतान को भी प्रदेश में हुए बदलाव के उदाहरण के तौर पर पेश किया।

कार्यशाला में कई राज्यों के अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष एस राधा चौहान, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल, आयोग की सदस्य अलका मित्तल, सचिव जगदीप गुप्ता व रुपाम के महानिदेशक एम देवराज सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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