लखनऊ, 14 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश वन निगम के साथ 64 करोड 82 लाख रुपये के लेनदेन में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। निगम ने लखनऊ स्थित बैंक ऑफ इंडिया की सदर शाखा पर वित्तीय धोखाधडी करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि बैंक ने फर्जी एफडी रसीद जारी कर निगम को गुमराह किया और बिना अनुमति निगम के नाम से खाता खोलकर करोडों रुपये उसमें ट्रांसफर कर दिए। मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
निवेश के लिए मांगे गए थे बैंक प्रस्ताव
वन निगम के मुताबिक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र में निवेश की गई 64 करोड 82 लाख 21 हजार 365 रुपये की राशि 29 दिसंबर 2025 को मैच्योर हुई थी। इस रकम को दोबारा निवेश करने के लिए निगम ने ईमेल के माध्यम से कई बैंकों से ब्याज दरों के प्रस्ताव मांगे। 30 दिसंबर 2025 को प्रस्ताव खोले गए, जिसमें बैंक ऑफ इंडिया सदर शाखा लखनऊ की ओर से दी गई 6.73 प्रतिशत ब्याज दर सबसे अधिक पाई गई।

ट्रांसफर में देरी का हवाला देकर बदली शर्तें
31 दिसंबर 2025 को वन निगम ने एचडीएफसी बैंक गोमती नगर शाखा को निर्देश दिए कि पूरी रकम बैंक ऑफ इंडिया के पार्किंग अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाए। निगम का आरोप है कि बैंक ऑफ इंडिया ने बाद में यह कहकर एफडी बनाने से मना कर दिया कि तय समय पर पैसा उनके खाते में नहीं पहुंचा और 1 जनवरी 2026 से नई ब्याज दरें लागू हो चुकी हैं।
पूरी राशि के बजाय आंशिक एफडी की जानकारी
कुछ समय बाद बैंक ऑफ इंडिया की ओर से निगम को बताया गया कि केवल 6 करोड 82 लाख रुपये की एफडी बनाई गई है, जबकि असल में 64 करोड 82 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इसके साथ ही बैंक ने यह भी बताया कि वन निगम के नाम से एक बचत खाता खोला गया है। निगम का कहना है कि इस खाते को खोलने की न तो अनुमति दी गई थी और न ही जिस व्यक्ति के नाम पर खाता खोला गया, वह निगम का अधिकृत कर्मचारी है।
नहीं मिला स्पष्टीकरण, FIR दर्ज
जब वन निगम ने एफडी से जुड़ी लिखित पुष्टि मांगी तो बैंक की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद पूरे लेनदेन को लेकर संदेह और गहरा गया। वन निगम के प्रबंध निदेशक अरविंद कुमार सिंह ने गाजीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर FIR दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड, खातों की जानकारी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।






