लखनऊ, 25 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश की आबकारी नीति अब सिर्फ प्रदेश तक सीमित नहीं रही। बीते कुछ समय में आबकारी राजस्व में लगातार बढ़ोतरी के बाद यूपी का मॉडल देश के दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन गया है। यही वजह है कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, झारखंड और हिमाचल प्रदेश समेत आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों के आबकारी आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी यूपी का दौरा कर यहां की व्यवस्था को करीब से समझने पहुंचे।
अधिकारियों ने यूपी में लागू आबकारी नीति को राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ पारदर्शिता, तकनीक के इस्तेमाल, अवैध शराब पर नियंत्रण और उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखकर बिल्कुल सटीक बताया।
आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में अलग-अलग राज्यों की टीमों ने यूपी का दौरा इसलिए किया ताकि यहां की आबकारी नीति और उसकी कार्यप्रणाली को समझकर अपने राज्यों में लागू करने की संभावनाएं तलाशी जा सकें।
दौरे में शामिल बाहरी राज्यों के अधिकारियों ने यूपी के आबकारी विभाग के अफसरों के साथ बैठकर विस्तार से चर्चा की। इसमें नीति निर्धारण, ई-गवर्नेंस, लाइसेंसिंग प्रक्रिया और निगरानी तंत्र जैसे मुद्दों पर खास तौर पर बातचीत हुई।
कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा के अधिकारियों ने यूपी की नीति को व्यावहारिक और राजस्व केंद्रित बताते हुए सराहा। कुछ राज्यों ने यह भी माना कि यूपी के अनुभव से सीख लेकर वे अपने यहां आबकारी ढांचे में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं।
यूपी दौरे के दौरान विभिन्न राज्यों के आबकारी अधिकारियों ने डिस्टिलरी और शराब की दुकानों का भी निरीक्षण किया। मकसद यह जानना था कि उत्पादन से लेकर बिक्री तक निगरानी किस तरह की जा रही है और अवैध गतिविधियों पर कैसे रोक लगाई जा रही है।
निरीक्षण के दौरान यूपी में लागू डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, ई-लॉटरी के जरिए दुकानों का आवंटन, बारकोडिंग और स्टॉक मैनेजमेंट जैसी व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों ने तारीफ की। उनका कहना था कि इन उपायों से राजस्व बढ़ने के साथ-साथ गड़बड़ियों और अनियमितताओं पर भी काफी हद तक लगाम लगी है।






