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घर-घर बैंकिंग, हाथों में कमाई : UP की ‘बीसी सखी’ योजना ने बदली ग्रामीण महिलाओं की तकदीर

इस योजना के तहत अब तक बीसी सखियों ने किया 40 हजार करोड़ रुपये का बैंकिंग लेनदेन, गांव-गांव तक पहुंचाई बैंकिंग, एक ग्राम पंचायत-एक बीसी सखी मॉडल ने लिखी सफलता की नई कहानी

लखनऊ, 7 फरवरी 2026:

यूपी में ग्रामीण बैंकिंग और महिला सशक्तिकरण की दिशा में शुरू की गई ‘एक ग्राम पंचायत-एक बीसी सखी’ योजना सफलता की मिसाल बन चुकी है। गांवों में तैनात बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट सखियों (बीसी सखी) ने न सिर्फ बैंकिंग सुविधाओं को लोगों के दरवाजे तक पहुंचाया है बल्कि हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बनाया है।

मई 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक करीब 40 हजार बीसी सखियां गांवों में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इनके माध्यम से राज्य में अब तक लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का बैंकिंग लेनदेन किया जा चुका है। इससे 106 करोड़ रुपये से अधिक का लाभांश अर्जित हुआ है। यह आंकड़े योजना की व्यापक स्वीकार्यता और प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।

बीसी सखियां गांवों में पैसे जमा और निकासी, खाते से लेनदेन, मनी ट्रांसफर, आरडी-एफडी खुलवाने, पेंशन और लोन आवेदन जैसी सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इससे ग्रामीणों को बैंक शाखाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे और समय व पैसे दोनों की बचत हो रही है। खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए यह सुविधा बेहद राहतभरी साबित हुई है।

राज्य की 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों की तैनाती का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 50,225 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर प्रमाणित किया जा चुका है। इनमें से लगभग 40 हजार वर्तमान में फील्ड में काम कर रही हैं। नियमित आय मिलने से ये महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभाल रही हैं, बल्कि गांव में सम्मान और पहचान भी बना रही हैं।

योगी सरकार की यह पहल आज गांवों में बैंक की नई पहचान बन चुकी है। ‘बीसी सखी’ योजना ने यह साबित किया है कि अगर अवसर और भरोसा मिले तो ग्रामीण महिलाएं विकास की सबसे मजबूत कड़ी बन सकती हैं। बैंकिंग पहुंच और महिला सशक्तिकरण दोनों मोर्चों पर यह योजना उत्तर प्रदेश की बड़ी उपलब्धि के रूप में उभर रही है।

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