Uttar Pradesh

सेहत का बजट बढ़ा, भरोसा भी: UP में 46,728 करोड़ का हेल्थ फोकस, आमजन पर कम हुआ स्वास्थ्य खर्च

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, पेश किया स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों का ब्योरा, राष्ट्रीय औसत से अधिक निवेश का दावा

लखनऊ, 9 फरवरी 2026:

यूपी सरकार ने वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के जरिए प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अपनी मजबूत प्रतिबद्धता को साफ तौर पर सामने रखा है। विधानसभा के बजट सत्र में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 46,728.48 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट आवंटित किया गया है। यह अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

आर्थिक सर्वे के अनुसार वर्ष 2025-26 में प्रदेश का स्वास्थ्य बजट कुल बजट का 6.1 प्रतिशत रहा जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं में अन्य राज्यों की तुलना में अधिक निवेश कर रहा है। इसका असर आमजन पर भी दिखने लगा है। सरकारी व्यय बढ़ने से लोगों के आउट ऑफ पॉकेट खर्च में लगातार कमी आई है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिली है।

स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने का सबसे बड़ा असर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर दिखा है। जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसे कार्यक्रमों के चलते संस्थागत प्रसव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2021-22 में जहां 34.74 लाख संस्थागत प्रसव हुए थे, वहीं 2024-25 में यह संख्या 18 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 41 लाख पहुंच गई। कुल प्रसवों में 96.12 प्रतिशत संस्थागत प्रसव होना स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती का प्रमाण माना जा रहा है। इसके उलट गैर-संस्थागत प्रसव में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

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टीकाकरण के मोर्चे पर भी प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आर्थिक सर्वे के मुताबिक 2024-25 में 5 वर्ष तक के बच्चों का 100 प्रतिशत पूर्ण टीकाकरण किया गया। पोलियो, टीबी, खसरा-रूबेला समेत 12 जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए सभी जनपदों में नियमित मुफ्त टीकाकरण जारी है।

नवजात और कुपोषित बच्चों की देखभाल के लिए SNCU, पोषण पुनर्वास केंद्र, HBNC और कंगारू मदर केयर जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन पहलों से बाल मृत्यु दर में कमी और स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार दर्ज किया जा रहा है। आर्थिक सर्वे साफ संकेत देता है कि यूपी में स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है।

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