लखनऊ, 9 फरवरी 2026:
यूपी के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को प्रदेश की पहली आर्थिक समीक्षा सदन के पटल पर रखते हुए विकास की एक सशक्त तस्वीर पेश की। समीक्षा में अर्थव्यवस्था के विस्तार, निवेश माहौल, प्रति व्यक्ति आय, राजकोषीय अनुशासन और क्षेत्रीय योगदान जैसे प्रमुख पहलुओं को सामने रखा गया।
वित्त मंत्री ने बताया कि बीते आठ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने ऐतिहासिक छलांग लगाई है। वर्ष 2016-17 में ₹13.30 लाख करोड़ की जीएसडीपी 2024-25 में बढ़कर ₹30.25 लाख करोड़ हो चुकी है, जबकि 2025-26 में इसके ₹36 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से स्थापित करने वाला कदम बताया।
निवेश के मोर्चे पर भी प्रदेश की छवि बदली है। पारदर्शी नीतियों, समयबद्ध स्वीकृतियों और ‘ट्रिपल एस’ यानी सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड की गारंटी के चलते अब तक ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में यूपी का योगदान 2016-17 के 8.6% से बढ़कर 2024-25 में 9.1% हो गया है।
प्रति व्यक्ति आय में लंबे समय से जारी गिरावट का रुझान पलटते हुए 2016-17 के ₹54,564 से बढ़कर 2024-25 में ₹1,09,844 पहुंच गई है। 2025-26 में इसके ₹1,20,000 तक पहुंचने का अनुमान है। राष्ट्रीय औसत के मुकाबले अनुपात भी 50.2% से सुधरकर 53.5% हो गया है। आर्थिक संरचना में विविधता दिखी है। कृषि की हिस्सेदारी 25.8%, उद्योग 27.2% और सेवा क्षेत्र 47% तक पहुंच चुका है।
बजट आकार 2016-17 के ₹3.47 लाख करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹8.33 लाख करोड़ होने का अनुमान है। पूंजीगत व्यय भी दोगुने से अधिक बढ़कर ₹147.72 हजार करोड़ हो गया। इससे अवसंरचना और रोजगार सृजन को बल मिला।
राजकोषीय अनुशासन पर जोर देते हुए सार्वजनिक ऋण से जीएसडीपी अनुपात 29.3% से घटकर 28.0% हुआ है। वहीं, स्टेट ओन टैक्स रेवेन्यू ₹0.86 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.09 लाख करोड़ तक पहुंचना कर सुधारों और प्रशासनिक दक्षता का संकेत है। पहली आर्थिक समीक्षा उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक उड़ान का रोडमैप पेश करती है।






