लखनऊ, 10 फरवरी 2026:
केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की समृद्ध योजना के तहत उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। इस योजना में प्रदेश से चार एक्सेलेरेटरों का चयन हुआ है, जिनके जरिये 35 स्टार्टअप्स को आगे बढ़ने का मौका मिला। इनमें से 27 स्टार्टअप्स को फंडिंग भी हासिल हुई है। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि उत्तर प्रदेश अब तेजी से स्टार्टअप हब की शक्ल ले रहा है।
समृद्ध योजना का मकसद नए उद्यमों को प्रोडक्ट डेवलपमेंट, तकनीकी मजबूती और बाजार तक पहुंच दिलाना है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप्स को कुल 9.91 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। यह रकम उत्पाद को बेहतर बनाने, कारोबार फैलाने और नई तकनीक अपनाने में इस्तेमाल की जा रही है। योजना में एक स्टार्टअप को अधिकतम 40 लाख रुपये तक की मैचिंग फंडिंग का प्रावधान है, साथ ही एक्सेलेरेटरों को भी सहयोग दिया जाता है।
प्रदेश स्तर पर केंद्र की योजनाओं को जमीन तक उतारने के लिए लगातार समन्वय किया जा रहा है। स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, निगरानी और बाजार से जोड़ने पर खास जोर है, ताकि उन्हें सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि टिकाऊ तरक्की का रास्ता भी मिल सके। समृद्ध योजना के लिए उत्तर प्रदेश से कुल 10 एक्सेलेरेटरों ने आवेदन किया था, जिनमें से 4 का चयन हुआ।
बीते कुछ वर्षों में स्टार्टअप्स के लिए बनाए गए अनुकूल माहौल का असर अब दिखने लगा है। नई स्टार्टअप नीति, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को बढ़ावा, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और सिंगल विंडो सिस्टम जैसी पहलें युवाओं को कारोबार की तरफ खींच रही हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ उपभोक्ता राज्य नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यम का मजबूत केंद्र बनता जा रहा है।
समृद्ध योजना के तहत हेल्थ टेक, एजुकेशन टेक, एग्री टेक, फिनटेक, सॉफ्टवेयर सर्विस और कंज्यूमर टेक जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स को समर्थन मिल रहा है। इन सेक्टर्स में प्रदेश के स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी यह इशारा करती है कि राज्य की अर्थव्यवस्था अब परंपरागत ढांचे से आगे निकलकर ज्ञान और तकनीक आधारित मॉडल की ओर बढ़ रही है।






