लखनऊ, 10 फरवरी 2026:
यूपी विधानमंडल के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को विधान परिषद में आरक्षण में कथित गड़बड़ियों को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। समाजवादी पार्टी के एमएलसी ने सदन के भीतर धरना देकर सरकार पर आरक्षण विरोधी रवैये का आरोप लगाया। नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच कार्यवाही बाधित होने पर सभापति को परिषद की बैठक कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
विपक्ष के सवालों के जवाब में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का ‘मीठा-मीठा गप और तीखा-तीखा थू’ वाला चरित्र रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार आरक्षण में किसी भी तरह की गड़बड़ी के पक्ष में नहीं है। उठाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी। मौर्य ने कहा कि सरकार ने साढ़े आठ लाख से ज्यादा सरकारी भर्तियां दी हैं। नकल माफियाओं पर कार्रवाई की और हर भर्ती में 60 फीसदी आरक्षण का पूरा पालन होगा। साथ ही कड़ी भाषा में चेतावनी दी कि आरक्षण में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

इससे पहले नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने सत्ता पक्ष के ओबीसी और एससी-एसटी विधायकों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कई भर्तियों का उदाहरण रखा। उन्होंने 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण गड़बड़ी का आरोप लगाया और कहा कि जिम्मेदार अधिकारी पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। यादव ने स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के 221 पदों में ओबीसी को 27 फीसदी के मुताबिक 60 पदों के बजाय सिर्फ 20 पद मिलने और पशु चिकित्सा अधिकारी के 404 पदों में ओबीसी को शून्य पद मिलने पर सवाल खड़े किए।
पीजीआई में असिस्टेंट प्रोफेसर की 158 पदों की भर्ती में भी एससी-एसटी व ओबीसी को 50 फीसदी के बजाय 72 पद मिलने को उन्होंने सीधी गड़बड़ी बताया।एमएलसी मान सिंह यादव ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी प्रतिनिधित्व बेहद कम होने और इंटरव्यू में ‘NFS’ लिखकर चयन में मनमानी के आरोप लगाए। विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही तय करने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की, वहीं सत्ता पक्ष ने जांच का भरोसा देकर माहौल को शांत करने की कोशिश की। इस तरह अन्य सदस्यों ने भी सरकार को घेरने की कोशिश की।






