लखनऊ, 11 फरवरी 2026:
इन्वेस्ट यूपी से जुड़े बहुचर्चित रिश्वत कांड में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले ने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी है। न्यायालय ने कारोबारी निकांत जैन के खिलाफ अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आरोपों में दर्ज आपराधिक मुकदमे को निरस्त कर दिया है। यह मामला प्रस्तावित सोलर पावर मैन्युफैक्चरिंग परियोजना से जुड़ा हुआ था। इसने पिछले साल प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी थी।
जस्टिस राजीव सिंह की एकल पीठ ने निकांत जैन की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कोई अपराध प्रथम दृष्टया बनता ही नहीं है। अदालत ने 15 मई 2025 को दाखिल चार्जशीट और 17 मई 2025 को जारी तलबी आदेश को भी रद्द कर दिया। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि शिकायतकर्ता ने स्वयं स्वीकार किया है कि शिकायत गलतफहमी के आधार पर दर्ज कराई गई थी।
मालूम हो कि 20 मार्च 2025 को लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज एफआईआर मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत पर आधारित थी। उसमें आरोप लगाया गया था कि सोलर मैन्युफैक्चरिंग परियोजना की मंजूरी के बदले परियोजना लागत के पांच प्रतिशत की रिश्वत मांगी गई। निकांत जैन की ओर से दलील दी गई कि आरोप अस्पष्ट हैं। किसी ठोस साक्ष्य पर आधारित नहीं हैं और यह पूरा मामला कारोबारी प्रतिद्वंद्विता व प्रशासनिक भ्रम का नतीजा है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि न तो किसी तरह की रकम दी गई, न कोई संपत्ति या प्रतिभूति सौंपी गई और न ही किसी प्रकार की धमकी का प्रमाण सामने आया।
कोर्ट ने पाया कि विवेचना के दौरान न तो कथित एक करोड़ रुपये नकद की कोई बरामदगी हुई और न ही ऐसा कोई साक्ष्य मिला जिससे यह साबित हो सके कि किसी लोक सेवक को अनुचित लाभ देने की पेशकश की गई थी। इस फैसले के बाद निलंबित आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश की बहाली का रास्ता भी साफ होता नजर आ रहा है। हालांकि उनकी मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं क्योंकि उनके खिलाफ विजिलेंस और ईडी की जांच जारी है और डिफेंस कॉरीडोर भूमि अधिग्रहण प्रकरण में भी उनका नाम सामने आ चुका है।






