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बीमारू से निवेश का हब बना UP : 50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों संग ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर तेज रफ्तार

9 वर्षों में निवेश, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, एफडीआई और निर्यात के नए रिकॉर्ड, 1.10 करोड़ रोजगार सृजन की संभावना, वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बन रहा यूपी

लखनऊ, 12 जून 2026:

यूपी आज देश की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो चुका है। नौ वर्षों में प्रदेश ने औद्योगिक विकास, निवेश, आधारभूत संरचना और रोजगार सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश अब एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

वर्ष 2017 से पहले निवेशकों के सामने कानून-व्यवस्था, आधारभूत सुविधाओं और निवेश-अनुकूल वातावरण की कमी बड़ी चुनौती थी लेकिन योगी सरकार के कार्यकाल में परिस्थितियां तेजी से बदली हैं। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनसे लगभग 1.10 करोड़ रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के चार चरणों में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रोजेक्ट धरातल पर उतर चुके हैं। इनसे करीब 60 लाख रोजगार अवसर पैदा हुए हैं। वहीं 7.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली पांचवीं जीबीसी की तैयारी चल रही है।

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निवेश को गति देने में प्रदेश के मजबूत होते बुनियादी ढांचे की बड़ी भूमिका रही है। वर्ष 2017 तक जहां प्रदेश में केवल दो एक्सप्रेसवे थे वहीं आज यूपी 22 एक्सप्रेसवे वाले राज्य के रूप में विकसित हो रहा है। वर्तमान में 9 एक्सप्रेसवे संचालित हैं। 3 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित हैं। एक्सप्रेसवे नेटवर्क के किनारे 26 जिलों में 5,300 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित की गई है। वहीं बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीआईडीए) के माध्यम से 56,662 एकड़ क्षेत्र में नया औद्योगिक शहर विकसित किया जा रहा है।

हवाई संपर्क के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल दो पूर्ण रूप से संचालित हवाई अड्डे थे। आज 17 एयरपोर्ट संचालन में हैं और 7 अन्य विकसित किए जा रहे हैं। नोएडा (जेवर) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के शुरू होने के साथ यूपी पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

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औद्योगिक प्रगति का सबसे बड़ा संकेतक विदेशी निवेश और निर्यात माना जाता है। जून 2000 से मार्च 2017 तक प्रदेश में मात्र 3,303 करोड़ रुपये का एफडीआई आया था और अप्रैल 2017 से जून 2025 के बीच यह बढ़कर 17,004 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। फैक्ट्रीज एक्ट के तहत पंजीकृत इकाइयों की संख्या भी 14,169 से बढ़कर 31,459 हो गई है। प्रदेश का निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। आईटी एवं आईटीईएस निर्यात 15 हजार करोड़ से बढ़कर 82 हजार करोड़ रुपये तथा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 3,862 करोड़ से बढ़कर 44,744 करोड़ रुपये हो गया है।

एमएसएमई क्षेत्र भी प्रदेश की विकास यात्रा का मजबूत आधार बना है। वर्तमान में इस क्षेत्र में 3.11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के तहत 20 हजार से अधिक उद्यमियों को 903 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है जिससे लाखों रोजगार अवसर सृजित हुए हैं।

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प्रदेश अब हाई-टेक उद्योगों का भी प्रमुख केंद्र बन रहा है। रक्षा औद्योगिक गलियारे के छह नोड विकसित किए जा रहे हैं। यहां 35 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित की जा रही है। 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश से आठ डेटा सेंटर पार्क विकसित हो रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर भी उत्तर प्रदेश निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 के दौरान 2.94 लाख करोड़ रुपये के एमओयू हुए हैं। वहीं सिंगापुर और जापान यात्राओं से 1.5 लाख करोड़ रुपये के समझौते और 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन पहलों से लगभग पांच लाख नए रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है।

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