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स्वामी प्रसाद मौर्य ने सरकार पर दागे सवाल, कहा… छात्रों के सुसाइड केस बढ़ रहे, राष्ट्रपति को देंगे ज्ञापन

मीडिया से मुखातिब हुए अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कहा- एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक एक साल में 13 हजार से ज्यादा छात्र कर चुके है आत्महत्या

लखनऊ, 12 फरवरी 2026:

अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य गुरुवार को लखनऊ में मीडिया से मुखातिब हुए। इस दौरान उन्होंने यूजीसी कानून, विश्वविद्यालयों में बढ़ते भेदभाव, छात्र आत्महत्याओं और बजट जैसे मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा।

मौर्य ने कहा कि केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत यूजीसी कानून लागू किया था। इसका मकसद विश्वविद्यालयों में एससी, ओबीसी और अन्य वंचित वर्गों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकना है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कुछ सवर्ण संगठनों ने इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया तो सरकार का रवैया नरम रहा। वहीं कानून के समर्थन में सड़क पर उतरे एससी और ओबीसी समाज के लोगों पर सख्ती दिखाई गई। उन्होंने इसे सरकार का दोहरा मापदंड बताया।

मौर्य ने विधायक डॉ. पल्लवी पटेल के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस बल प्रयोग किया गया, जो ठीक नहीं है। उनके मुताबिक यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है और इससे साफ है कि सरकार दबाव में काम कर रही है। उन्होंने राज्यसभा में पेश आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि आईआईटी कानपुर समेत कई केंद्रीय संस्थानों में छात्र आत्महत्या के मामले सामने आए हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक एक साल में 13 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने आत्महत्या की।

मौर्य ने कहा कि विश्वविद्यालयों में भेदभाव और मानसिक दबाव इसके बड़े कारण हैं। इस पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे। इसमें मांग की जाएगी कि एससी और ओबीसी छात्रों के साथ हो रहे भेदभाव पर रोक लगे, यूजीसी कानून को सख्ती से लागू किया जाए और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच कराई जाए। मौर्य का कहना है कि ज्यादातर छात्र इस कानून के पक्ष में हैं, लेकिन कुछ लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रेस वार्ता में उन्होंने बजट को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका कहना था कि यह बजट गरीबों और वंचितों के हित में नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पिछले बजट का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हुआ तो नया बजट लाने का क्या मतलब है।

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