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शंकराचार्य पद की मर्यादा सर्वोपरि… CM का पद भी कानून से ऊपर नहीं, विधानसभा में योगी का दो टूक संदेश

राज्यपाल के अभिभाषण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है, मर्यादा व व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी, नैतिकता की बात करने वालों को पहले परंपरा व व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए

लखनऊ, 14 फरवरी 2026:

यूपी विधानसभा में शंकराचार्य विवाद पर गरमाई बहस के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखते हुए कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और अत्यंत पवित्र है। यह कोई साधारण उपाधि नहीं है जिसे कोई भी स्वयं धारण कर ले। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि परंपरा और व्यवस्था का सम्मान किए बिना नैतिकता की बातें करना दोहरापन है।

मुख्यमंत्री ने सपा शासनकाल में वाराणसी की पुरानी घटना का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में शंकराचार्य थे तो उनके खिलाफ लाठीचार्ज और एफआईआर जैसी कार्रवाई क्यों हुई? उन्होंने कहा कि तथ्यों को तोड़मरोड़ कर पेश करना ठीक नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि सदन में भ्रम नहीं, तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए।

माघ मेला में मौनी अमावस्या के अवसर पर साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ऐसे विशाल आयोजनों में प्रवेश और निकास के मार्ग तय होते हैं। नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य होता है। नियमों की अनदेखी भगदड़ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है जिससे श्रद्धालुओं की जान जोखिम में पड़ती है। उन्होंने दोहराया कि कानून सबके लिए समान है। मुख्यमंत्री का पद भी कानून से ऊपर नहीं।

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आध्यात्मिक परंपरा पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने देश की चारों दिशाओं में चार पीठों की स्थापना की। उत्तर में ज्योतिष पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में द्वारिकापुरी। इन पीठों की अपनी परंपराएं और दायित्व हैं तथा चारों वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद इनसे जुड़े माने जाते हैं। हर वेद के महावाक्य प्रज्ञानं ब्रह्म, अहम् ब्रह्मास्मि, तत्त्वमसि और अयमात्मा ब्रह्म भारतीय दर्शन की आत्मा हैं जो साधना की सर्वोच्च अवस्था का बोध कराते हैं।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बार-बार एक ही बात को विवाद का रूप दिया जा रहा है। हम मर्यादित लोग हैं। कानून के शासन पर विश्वास भी करते हैं और उसका पालन करवाना भी जानते हैं। यह कहते हुए उन्होंने सदन में जिम्मेदार आचरण की अपील की।

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