बाराबंकी, 5 मार्च 2026:
बाराबंकी जिले के देवा स्थित सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर बुधवार को फूलों की होली के दौरान भाईचारे और सौहार्द का संदेश देखने को मिला। दरगाह परिसर में बड़ी संख्या में अलग-अलग धर्मों के लोग एकत्र हुए और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर उत्सव मनाया।
करीब सवा सौ साल से चली आ रही इस परंपरा को निभाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से हिंदू, मुस्लिम व अन्य समुदाय के जायरीन देवा शरीफ पहुंचे। दरगाह परिसर में वारिस पिया के जयकारों के बीच गुलाल उड़ाया गया और माहौल रंगों से सराबोर हो गया।

उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में युवतियां और महिलाएं भी शामिल हुईं। उन्होंने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया और गुलाब की पंखुड़ियां बरसाकर खुशी जाहिर की। ढोल-नगाड़ों की थाप और कव्वाली की धुन पर लोग झूमते नजर आए। कई युवतियां हाथ थामकर नाचती और होली के गीतों पर झूमती दिखाई दीं।
देवा शरीफ की इस होली को सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल माना जाता है। यहां वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है, जिसमें अलग-अलग धर्मों के लोग एक साथ मिलकर रंगों का उत्सव मनाते हैं। दरगाह पर पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना था कि यहां की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं बल्कि दिलों को जोड़ने का माध्यम है। इस परंपरा के जरिए सूफी संत हाजी वारिस अली शाह का संदेश ‘जो रब है वही राम है’ आज भी जीवित है।







