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साइबर फ्रॉड पर आरबीआई का नया प्रस्ताव… पीड़ित ग्राहकों को मिलेगा मुआवजा

50 हजार रुपये तक की ऑनलाइन धोखाधड़ी पर राहत, अधिकतम 25 हजार रुपये तक भुगतान का प्रावधान

बिजनेस डेस्क, 7 मार्च 2026:

ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में बैंक ग्राहकों को राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने नए नियमों का मसौदा जारी किया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत डिजिटल फ्रॉड का शिकार होने वाले ग्राहकों को मुआवजा देने की व्यवस्था की गई है। यह नियम एक जुलाई 2026 से सभी वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंकों पर लागू किए जाने का प्रस्ताव है।

50 हजार तक के नुकसान पर मिलेगा मुआवजा
मसौदे के अनुसार यदि किसी ग्राहक के साथ 50 हजार रुपये तक की साइबर धोखाधड़ी होती है, तो उसे मुआवजा मिल सकेगा। ऐसे मामलों में नुकसान की राशि का 85 प्रतिशत तक भुगतान किया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये तय की गई है।

हालांकि मुआवजा पाने के लिए ग्राहक को धोखाधड़ी की जानकारी मिलने के पांच दिनों के भीतर अपने बैंक में शिकायत दर्ज करानी होगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल या 1930 हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराना जरूरी होगा।

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ग्राहक को केवल एक बार मिलेगी सुविधा
इस प्रस्ताव के तहत मुआवजा पाने की सुविधा किसी ग्राहक को जीवन में केवल एक बार मिलेगी। मुआवजे की राशि का बड़ा हिस्सा रिजर्व बैंक वहन करेगा। प्रस्ताव के अनुसार कुल बोझ का 65 प्रतिशत हिस्सा आरबीआई, 10 प्रतिशत ग्राहक का बैंक और 10 प्रतिशत लाभार्थी बैंक वहन करेंगे।

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आरबीआई ने यह भी कहा है कि 500 रुपये से अधिक के हर इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन पर ग्राहकों को तत्काल एसएमएस अलर्ट भेजना जरूरी होगा। इसके अलावा बैंकों को सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रणाली और धोखाधड़ी पहचान तंत्र को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

धोखाधड़ी के मामलों में ग्राहक की लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की होगी। यदि बैंक की प्रणाली में कमी या किसी तीसरे पक्ष की गलती से धोखाधड़ी होती है और ग्राहक समय पर सूचना देता है, तो उसे किसी तरह की वित्तीय जिम्मेदारी नहीं उठानी पड़ेगी।

हालांकि यदि ग्राहक स्वयं अपना पिन, ओटीपी या पासवर्ड किसी के साथ साझा करता है या किसी संदिग्ध एप को डाउनलोड करता है, तो इसे ग्राहक की लापरवाही माना जाएगा। ऐसी स्थिति में मुआवजा नहीं दिया जाएगा। बैंक को शिकायत मिलते ही संदिग्ध लेनदेन रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी होगी।

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