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‘चितेरी’ लोककला ने बनाया आत्मनिर्भर… झांसी की प्रतिभा ने हुनर को बाजार से जोड़ा

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान से मिला 4.5 लाख रुपये का ब्याजमुक्त ऋण, अब करतीं है जूट बैग व गिफ्ट आइटम का निर्माण

लखनऊ, 13 मार्च 2026:

उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दे रही है। इसी का लाभ उठाकर झांसी की प्रतिभा डोंगरे ने बुंदेलखंड की पारंपरिक चितेरी लोककला को नया रूप दिया है और उसे बाजार से जोड़कर सफल उद्यम की मिसाल पेश की है।

प्रतिभा ने फाइन आर्ट्स में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। कॉलेज के समय से ही उनकी रुचि कला में रही। बुंदेलखंड के गांवों में घरों के दरवाजों और खिड़कियों पर देवी-देवताओं की आकृतियां बनाने की चितेरी परंपरा को उन्होंने जूट के उत्पादों पर उतारने की पहल की। इसके जरिए उन्होंने जूट बैग, गिफ्ट आइटम, गमछे, मोमेंटो और मेडल जैसे उत्पाद तैयार करना शुरू किया। पहले यह कला दीवारों तक सीमित थी, लेकिन अब इन उत्पादों के माध्यम से इसे नई पहचान मिल रही है।

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प्रतिभा को झांसी के राइज इन्क्यूबेशन सेंटर से जुड़ने के बाद मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान की जानकारी मिली। योजना के तहत उन्हें करीब एक महीने के भीतर 4.5 लाख रुपये का ब्याजमुक्त ऋण मिला। इस सहयोग से उन्होंने मशीनें खरीदीं और रचनात्मक ऑर्टस नाम से अपने उद्यम की शुरुआत की।

आज इस पहल से 25 महिलाओं को रोजगार मिला है। कुछ महिलाएं यूनिट में काम करती हैं, जबकि कई महिलाएं कच्चा माल लेकर घर से ही उत्पाद तैयार करती हैं। तैयार उत्पादों को बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है।

प्रतिभा के बनाए जूट बैग और अन्य उत्पाद स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी दफ्तरों और कॉर्पोरेट कार्यक्रमों में भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इस पहल से न केवल बुंदेलखंड की पारंपरिक कला को नया बाजार मिला है, बल्कि स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। इस तरह प्रतिभा ने आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है।

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