Lucknow City

लखनऊ में SFI का कलेक्ट्रेट मार्च, उच्च शिक्षा में भेदभाव खत्म करने की उठाई आवाज

यूजीसी के प्रस्तावित रेगुलेशन को लागू करने और इसे ‘रोहित एक्ट’ के नाम से प्रभावी बनाने की मांग, परिवर्तन चौक से डीएम कार्यालय तक निकाला मार्च, छात्र-छात्राओं ने प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा मांगों का ज्ञापन

लखनऊ, 17 मार्च 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की जिला इकाई ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और न्याय सुनिश्चित करने की मांग को लेकर परिवर्तन चौक से डीएम कार्यालय (कलेक्ट्रेट) तक मार्च निकाला। मार्च के बाद छात्र-छात्राओं ने प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं।

यह प्रदर्शन यूजीसी के प्रस्तावित ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा’ रेगुलेशन, 2026 को लागू करने और इसे ‘रोहित एक्ट’ के नाम से प्रभावी बनाने की मांग को लेकर किया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला संयोजक अंकित गुप्ता ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ते भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सामाजिक भेदभाव के मामलों से निपटने के लिए मजबूत और पारदर्शी तंत्र की आवश्यकता है। एसएफआई ने मांग की कि एक स्वतंत्र और वैधानिक बाहरी समिति का गठन किया जाए। उसमें एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों का बहुमत प्रतिनिधित्व हो तथा जो विश्वविद्यालय प्रशासन से स्वतंत्र रूप से कार्य करे।

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संगठन ने यह भी मांग उठाई कि सामाजिक बहिष्कार, अलगाव और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे कृत्यों को स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में परिभाषित किया जाए। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाए और लापरवाही बरतने वाले प्रशासकों पर भी आपराधिक लापरवाही के आरोप तय किए जाएं।

एसएफआई ने देशपांडे समिति की सिफारिशों के अनुरूप सबूत का भार संस्थानों पर डालने और स्वतः संज्ञान लेकर जांच करने की शक्तियों से युक्त राष्ट्रीय निगरानी आयोग के गठन की भी मांग की। साथ ही एससी, ओबीसी और गैर-अधिसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति निधि के पूर्ण और न्यायसंगत उपयोग को सुनिश्चित करने की बात कही। एसएफआई ने का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव के खिलाफ उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। सरकार से इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की।

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