लखनऊ, 20 मार्च 2026:
यूपी की तस्वीर पिछले नौ वर्षों में तेजी से बदली है। प्रदेश अब देश के उभरते लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब के रूप में सामने आया है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, जलमार्ग और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के व्यापक विस्तार ने विकास को नई दिशा दी है, जिससे निवेश, निर्यात और रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व संभावनाएं बनी हैं।
2017 से पहले प्रदेश में केवल 2 एक्सप्रेसवे संचालित थे और औद्योगिक विकास के लिए योजनाबद्ध कॉरिडोर आधारित विकास सीमित था। लॉजिस्टिक्स लागत अधिक होने और परिवहन में देरी से उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होती थी। एविएशन सेक्टर और जलमार्ग विकास भी शुरुआती अवस्था में थे।इससे प्रदेश बड़े निवेश गंतव्य के रूप में पिछड़ा हुआ माना जाता था।
हालांकि, पिछले 9 वर्षों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अब प्रदेश में एक्सप्रेसवे की संख्या बढ़कर 22 हो गई है जिनमें 7 संचालित, 5 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित हैं। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजर रहा है। इन एक्सप्रेसवे के किनारे 26 जनपदों के 27 स्थानों पर करीब 5,300 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित की गई है।

बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के गठन के साथ 47 वर्षों बाद एक नए औद्योगिक शहर की नींव रखी गई है। इससे 56,662 एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। निर्यात के क्षेत्र में भी सुधार हुआ है। ‘एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 2024’ में उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर पहुंच गया है। 2022 में यह सातवें स्थान पर था। लैंडलॉक्ड राज्यों में प्रदेश का पहला स्थान इसकी नीतिगत मजबूती को दर्शाता है।
लॉजिस्टिक्स सेक्टर में सुधार से परिवहन समय और लागत में कमी आई है। इससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी और निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। सड़क निर्माण में तेजी के साथ औसतन 19 किलोमीटर प्रतिदिन सड़क निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है।
जलमार्ग कनेक्टिविटी को मजबूत करते हुए वाराणसी में देश का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल स्थापित किया गया है। रामनगर, चंदौली, मीरजापुर और गाजीपुर में टर्मिनल और फ्रेट विलेज विकसित किए जा रहे हैं। इससे माल परिवहन को नई दिशा मिल रही है।
एविएशन सेक्टर में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्तमान में प्रदेश में 16 हवाई अड्डे संचालित हैं। नमें 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल हैं जबकि 8 हवाई अड्डे प्रक्रियाधीन हैं। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन जाएगा जहां 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे होंगे।
सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब बनाना है। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी, मजबूत एक्सप्रेसवे नेटवर्क और औद्योगिक कॉरिडोर के विकास से लॉजिस्टिक्स लागत में और कमी आएगी तथा व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी।






