Uttar Pradesh

हरियाली में UP नंबर वन : इस वर्ष 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य, 277 करोड़ पौधरोपण का रिकॉर्ड रचेगा प्रदेश

योगी सरकार के 9 वर्षों में 242 करोड़ पौधरोपण, वनाच्छादन 559 वर्ग किमी बढ़ा, जनआंदोलन बना हरित मिशन, वाराणसी में एक घंटे में 2,51,446 पौधे लगाकर चीन का आठ साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा

लखनऊ, 25 मार्च 2026:

उत्तर प्रदेश एक बार फिर हरियाली के नए इतिहास की ओर बढ़ रहा है। सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश ने बीते 9 वर्षों में पौधरोपण के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2008 से 2016 के बीच मात्र 65.27 करोड़ पौधे लगाए गए थे वहीं 2017 के बाद से अब तक 242.13 करोड़ से अधिक पौधरोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है।

अब वर्ष 2026 में 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश 277 करोड़ पौधरोपण का आंकड़ा पार कर देश में ‘हरित प्रदेश’ के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।प्रदेश में हरित प्रयासों का असर साफ दिखाई दे रहा है। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट-2023 के अनुसार राज्य का वनाच्छादन 559.19 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। यह उपलब्धि केवल सरकारी योजनाओं का परिणाम नहीं बल्कि जनभागीदारी से बने एक बड़े आंदोलन का नतीजा है।

प्रदेश सरकार ने पौधरोपण को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। सीएम योगी हर साल 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर खुद पौधरोपण कर इस अभियान की शुरुआत करते और फिर पूरे वर्ष इसे गति देते हैं। पांच जून को योगी का जन्मदिन भी है। वाराणसी में हाल ही में आयोजित वृहद पौधरोपण कार्यक्रम ने विश्व रिकॉर्ड बनाकर प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में एक घंटे में 2,51,446 पौधे लगाकर चीन का आठ साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया गया।

प्रदेश में ‘ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट’ जैसी अभिनव पहल भी शुरू की गई है। इसमें नवजात बच्चों के नाम पर पौधे रोपकर उनके संरक्षण का संकल्प दिलाया जा रहा है। वर्ष 2026 के लिए भी तैयारियां जोरों पर हैं। 52 करोड़ से अधिक पौधे पौधशालाओं में तैयार किए जा रहे हैं। बजट में सामाजिक वानिकी के लिए 800 करोड़ रुपये, पौधशाला प्रबंधन के लिए 220 करोड़ और प्रतिकारात्मक वन रोपण के लिए 189 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इसके साथ ही ‘ग्रीन चौपाल’ के जरिए गांव-गांव में लोगों को जोड़ा जा रहा है। अब तक 18 हजार से अधिक गांवों में चौपालों का गठन हो चुका है। हर महीने पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा और योजना बनाई जाती है। मुख्यमंत्री का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक प्रदेश का हरित आवरण 15 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। जिस तरह से पौधरोपण जनभागीदारी का रूप ले चुका है उससे यह लक्ष्य भी दूर नहीं लगता। उत्तर प्रदेश अब पर्यावरण संरक्षण में भी देश के लिए मिसाल बनता जा रहा है।

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