लखनऊ, 26 मार्च 2026:
यूपी अब पारंपरिक गोसंरक्षण को आधुनिक तकनीक से जोड़कर देश में एक नया मॉडल स्थापित करने की तैयारी में है। सीएम योगी के विजन के तहत प्रदेश को टेक्नोलॉजी बेस्ड गोसंरक्षण मॉडल स्टेट के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस पहल के तहत गोशालाओं को केवल पशुओं के आश्रय स्थल तक सीमित न रखकर उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
गो सेवा आयोग द्वारा तैयार इस महत्वाकांक्षी योजना में ‘पंचगव्य वैल्यू चेन’ पर विशेष फोकस किया गया है। गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी के माध्यम से 100 से अधिक ऑर्गेनिक उत्पाद तैयार करने का खाका बनाया गया है। इन उत्पादों को बाजार में बेहतर ब्रांडिंग और बिक्री के जरिए स्थापित करने की भी रणनीति तैयार की गई है।
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों का सहयोग लिया जा रहा है। आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर वीके विजय इस प्रोजेक्ट में तकनीकी मार्गदर्शन दे रहे हैं। उनकी टीम गांवों में जाकर स्थानीय लोगों को स्किल ट्रेनिंग देगी। इससे बायोगैस प्लांट के संचालन और उत्पाद निर्माण में दक्षता बढ़ेगी। वहीं आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र यशराज और उनकी टीम उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग में सहयोग करेंगे।
योजना के पहले चरण में जालौन जिले की गोशालाओं को चुना गया है, जहां बायोगैस प्लांट स्थापित कर बायो-सीएनजी, जैविक खाद और अन्य पंचगव्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर पूरे प्रदेश की गोशालाओं में इस मॉडल को लागू किया जाएगा।
इस पहल से छोटे पशुपालकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। उनके उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलेगा और आय के नए स्रोत विकसित होंगे। साथ ही गांव-गांव में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार यह मॉडल दोहरे लाभ का माध्यम बनेगा। एक ओर गोवंश का सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित होंगे तो दूसरी ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। तकनीक और परंपरा का यह संगम उत्तर प्रदेश के गांवों में आत्मनिर्भरता का एक नया अध्याय लिखने जा रहा है।






