नोएडा, 29 मार्च 2026:
यूपी की सियासत में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। नोएडा के दादरी में रविवार को आयोजित समाजवादी समानता भाईचारा रैली के जरिए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार का शंखनाद कर दिया। इस रैली में उन्होंने भाजपा और सरकार पर तीखे हमले किए और कई बड़े राजनीतिक संदेश दिए।
अखिलेश यादव ने जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन को लेकर भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश के 7 में से 6 एयरपोर्ट बंद हो चुके हैं। कम से कम यह वादा तो कर देते कि उद्घाटन के बाद इसे बेचा नहीं जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल दिखावे के लिए परियोजनाओं का उद्घाटन कर रही है।
रैली के दौरान उन्होंने सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जिसने अत्याचार और अन्याय नहीं झेला वह हमारे दर्द को नहीं समझ सकता। मंदिर जाने के बाद शुद्धिकरण की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे सामाजिक असमानता का उदाहरण बताया और कहा कि अब समय बदल चुका है, भेदभाव छोड़ना होगा।
सपा प्रमुख ने भाजपा पर चुनावी धांधली और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहती है, उसे भीड़ जुटाने के लिए सरकारी कर्मचारियों का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि अब उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली से भी भाजपा की विदाई तय है।

अखिलेश यादव ने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूती से आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह सिर्फ रैली नहीं बल्कि सामाजिक न्याय की स्थापना का आह्वान है। उन्होंने आरोप लगाया कि 5% लोग 95% आबादी का शोषण कर रहे हैं। इसे बदलने के लिए लंबी लड़ाई लड़ने का संकल्प जताया।
संविधान और आरक्षण के मुद्दे पर भी उन्होंने भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि बाबा साहब का दिया संविधान हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इसकी रक्षा पीडीए के लिए जीवन-मरण का सवाल है। साथ ही आरोप लगाया कि भाजपा के एजेंडे में न नौकरी है और न ही आरक्षण। रैली में उन्होंने कई लोकलुभावन वादे भी किए। उनमें समाजवादी पेंशन योजना को दोबारा शुरू करना, महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देना और 1090 सेवा को और मजबूत बनाना शामिल है। किसानों के लिए बाजार दर पर जमीन खरीदने की बात भी उन्होंने कही।
इससे पहले अखिलेश यादव ने सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसे गुर्जर समुदाय को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पश्चिमी यूपी की करीब 24 सीटों पर गुर्जर वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ये अब तक भाजपा के साथ रहे हैं। ऐसे में सपा इस समीकरण में सेंध लगाने की कोशिश में जुट गई है।






