Ayodhya

रामनगरी में सरस मेला की रौनक : संस्कृति, स्वावलंबन और वोकल फॉर लोकल का संगम

राम की पैड़ी पर सजे स्टॉल, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मिला सशक्त मंच, साकेत संध्या से जीवंत हुई अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत

अयोध्या, 30 मार्च 2026:

रामनगरी अयोध्या ग्रामीण विकास और सांस्कृतिक विरासत के अद्भुत संगम की साक्षी बन रही है। राम की पैड़ी पर आयोजित सरस मेला और साकेत संध्या स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ क्षेत्रीय कलाकारों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को भी सशक्त मंच प्रदान कर रहे हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ रविवार को प्रदेश के ग्राम्य विकास आयुक्त जीएस प्रियदर्शी, डीएम निखिल टीकाराम, सीडीओ कृष्ण कुमार सिंह और आकांक्षा समिति की उपाध्यक्ष प्रियंका द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर स्वर सती के चित्र पर दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ मेले की शुरुआत हुई। इसके बाद अधिकारियों ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया।

सीडीओ ने बताया कि सरस मेला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। यहां उनके द्वारा तैयार उत्पादों को न केवल पहचान मिल रही है, बल्कि बिक्री के जरिए उनकी आय और आत्मविश्वास में भी वृद्धि हो रही है।

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मेले में देवीपाटन मंडल के विभिन्न जनपदों से आए लगभग 47 स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन स्टॉलों पर अचार, राम मंदिर के मॉडल, गोबर से बनी धूपबत्ती, जैविक खाद, पापड़, सजावटी वस्तुएं, फर्नीचर, सिलाई-कढ़ाई उत्पाद और दुग्ध उत्पाद जैसे विविध सामान उपलब्ध हैं। यह मेला ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को सशक्त रूप से आगे बढ़ा रहा है।

सरयू आरती के बाद हर शनिवार और रविवार को ‘साकेत संध्या’ का आयोजन किया जा रहा है। इसमें स्थानीय कलाकार भक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय बना रहे हैं। राम की पैड़ी का पूरा क्षेत्र संगीत और संस्कृति से सराबोर नजर आ रहा है।

हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस मेले में पहुंचकर न केवल खरीदारी कर रहे हैं बल्कि अयोध्या की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से भी रूबरू हो रहे हैं। यह आयोजन ग्रामीण कारीगरों और महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के साथ-साथ अयोध्या को सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। प्रशासन ने पर्यटकों से कहा है कि वे स्थानीय उत्पादों को अपनाकर स्वदेशी को बढ़ावा दें और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करें।

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