लखनऊ/मैनपुरी, 7 अप्रैल 2026:
1857 की क्रांति की गूंज से पहचानी जाने वाली मैनपुरी की धरती अब एक नए सांस्कृतिक रूप में सामने आने जा रही है। शहर में करीब 63 करोड़ रुपये की लागत से भव्य सांस्कृतिक केंद्र बनाया जा रहा है, जो इतिहास, कला और आधुनिक सुविधाओं का संगम होगा।
यह केंद्र ऐतिहासिक तेजसिंह किले के पास करीब 25,544 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित हो रहा है। जगह का चयन इस तरह किया गया है कि लोगों की आवाजाही आसान रहे और ज्यादा से ज्यादा लोग यहां तक पहुंच सकें। डिजाइन में भी खास ध्यान रखा गया है ताकि अलग-अलग गतिविधियों के लिए अलग स्पेस मिल सके और रखरखाव में दिक्कत न आए।
केंद्र में 800 सीटों वाला आधुनिक सभागार तैयार किया जा रहा है, जहां बड़े कार्यक्रम, सम्मेलन और सांस्कृतिक आयोजन हो सकेंगे। इसके साथ ही संग्रहालय, प्रदर्शनी गैलरी, खुला एम्फीथिएटर, प्रायोगिक थिएटर, लाइब्रेरी, छात्रावास और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं भी होंगी। शहर की कला, मूर्तियां और शिल्प को दिखाने के लिए खास गैलरियां बनाई जा रही हैं।

परियोजना में म्यूजिकल फाउंटेन, वर्कशॉप एरिया और एंटरटेनमेंट स्पेस भी शामिल हैं। यहां आने वाले लोग प्रदर्शनियों के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भी हिस्सा ले सकेंगे। स्थानीय शिल्प और उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए रिटेल स्पेस भी रखा गया है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस केंद्र का मकसद मैनपुरी की विरासत को नई पहचान देना है। यहां स्थानीय कलाकारों को मंच मिलेगा और लोग अपनी जड़ों से जुड़ पाएंगे। आने वाले समय में यह जगह देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी।
अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात के मुताबिक, प्रदेश में इस तरह के सांस्कृतिक केंद्रों की योजना पर काम चल रहा है ताकि युवाओं को अपने इतिहास और संस्कृति से जोड़ा जा सके। मैनपुरी का यह प्रोजेक्ट उसी दिशा में एक अहम कदम है।






