लखनऊ, 18 अप्रैल 2026:
यूपी में अपराधियों के लिए अब बच निकलना और मुश्किल होने जा रहा है। योगी सरकार ने पुलिसिंग को तकनीक और वैज्ञानिक जांच से लैस करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) से 300 प्रशिक्षित क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार कर लिए हैं। इसी कड़ी में तीसरे बैच के तहत 105 नए एक्सपर्ट्स को ट्रेनिंग देकर मैदान में उतारने की तैयारी पूरी हो चुकी है। दो बैच पहले ही प्रशिक्षित किए जा चुके हैं।
प्रदेश के विभिन्न कमिश्नरेट और जनपदों से आए पुलिसकर्मियों ने 42 दिन का विशेष क्राइम सीन मैनेजमेंट प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान उन्हें साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण, वैज्ञानिक सैंपलिंग, एविडेंस प्रिजर्वेशन और टेक्नोलॉजी आधारित जांच की बारीकियां सिखाई गईं। इसका मकसद घटनास्थल से मिलने वाले हर छोटे से छोटे सुराग को सुरक्षित रखना और जांच को मजबूत बनाना है।

एडीजी (तकनीकी सेवाएं) नवीन अरोरा के मुताबिक अपराधी अक्सर घटनास्थल पर ऐसे साक्ष्य छोड़ जाता है जो केस की दिशा बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित क्राइम सीन एक्सपर्ट अब उन गलतियों को रोकेंगे जिनकी वजह से कई बार जांच कमजोर पड़ जाती है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि सभी प्रशिक्षित कर्मी अपने-अपने जिलों में वर्कशॉप आयोजित कर अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करें। इससे यह विशेषज्ञता पूरे पुलिस बल तक पहुंचे।
UPSIFS के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी के अनुसार कुल पांच चरणों में 500 क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार करने की योजना है। तीसरे बैच के बाद चौथा बैच 27 अप्रैल से शुरू होगा जिससे यह अभियान और तेज हो जाएगा। यूपी पुलिस अब पारंपरिक जांच के बजाय वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण अपनाकर अपराधियों के खिलाफ शिकंजा और कसने की तैयारी में है। इस पहल से प्रदेश में फॉरेंसिक आधारित जांच तंत्र को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।






